दरभंगा। बिहार के दरभंगा हवाई अड्डे पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब मुंबई से आई स्पाइसजेट की उड़ान एसजी-115 के उतरते ही उसका एक टायर फट गया। सोमवार सुबह लगभग 9:48 बजे विमान रनवे पर लैंड कर रहा था, तभी यह तकनीकी खराबी सामने आई। टायर फटने के बावजूद पायलट ने संयम और कुशलता का परिचय देते हुए विमान को नियंत्रित रखा, जिससे संभावित बड़ा हादसा टल गया। विमान में मौजूद 148 यात्रियों और चालक दल के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित रहे, जिससे राहत की सांस ली गई।
रनवे पर घिसटता रहा पहिया, यात्रियों में मच गई दहशत
प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के अनुसार टायर फटने के बाद विमान का क्षतिग्रस्त पहिया कुछ दूरी तक रनवे पर घिसटता रहा। इस दौरान विमान में तेज कंपन महसूस हुआ, जिससे कई यात्री घबरा गए और कुछ समय के लिए विमान के भीतर चीख-पुकार जैसी स्थिति बन गई। हालांकि चालक दल ने यात्रियों को शांत रखने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रित बनाए रखा। विमान सुरक्षित रूप से पूरी तरह रुकने के बाद ही यात्रियों को क्रमबद्ध तरीके से बाहर निकाला गया।
एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही दरभंगा हवाई अड्डा प्रशासन और तकनीकी टीम सक्रिय हो गई। एयरपोर्ट निदेशक दिलीप कुमार के अनुसार विमान के रुकते ही सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद विमान को मुख्य रनवे से हटाकर एप्रन पर ले जाया गया ताकि अन्य उड़ानों का संचालन प्रभावित न हो और तकनीकी जांच निर्बाध रूप से की जा सके। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
तकनीकी जांच के बाद बदला गया टायर
घटना के बाद विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की गई ताकि टायर फटने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों ने क्षतिग्रस्त टायर को बदलने के साथ-साथ लैंडिंग गियर और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों का भी निरीक्षण किया। सभी आवश्यक सुरक्षा परीक्षण और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद विमान को दोबारा उड़ान के लिए फिट घोषित किया गया। इसके बाद सोमवार शाम लगभग 6:13 बजे विमान ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर पुनः उड़ान भरी।
विमानन सुरक्षा में नियमित निरीक्षण की अहमियत
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विमानों में एक टायर फटने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था मौजूद होती है। फिर भी ऐसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि नियमित तकनीकी निरीक्षण, समय पर रखरखाव और उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। पायलट का प्रशिक्षण, एयर ट्रैफिक कंट्रोल का समन्वय और एयरपोर्ट की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ऐसे मामलों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
बड़ा हादसा टला, सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इसने विमानन सुरक्षा और तकनीकी निगरानी की आवश्यकता पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में यात्रियों की बढ़ती संख्या के साथ विमानों की नियमित जांच, बेहतर रखरखाव और सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की जरूरत पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में जोखिम को और कम किया जा सकता है, ताकि हवाई यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनी रहे।