नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फिलहाल एथेनॉल सप्लाई की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। इस फैसले से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी E20 ईंधन नीति के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की तत्काल बाधा नहीं आएगी और राष्ट्रीय स्तर पर लागू मौजूदा व्यवस्था प्रभावी रहेगी।
क्या है पूरा एथेनॉल सप्लाई विवाद?
यह विवाद एक निजी डिस्टिलरी द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ। कंपनी का दावा था कि उसकी वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 9.90 करोड़ लीटर है और उसने 9.26 करोड़ लीटर की आपूर्ति के लिए बोली लगाई थी, लेकिन उसे केवल 3.92 करोड़ लीटर का ही आवंटन मिला। कंपनी ने दलील दी कि पहले के वर्षों में उसे अधिक मात्रा में आवंटन मिलता रहा है, इसलिए इस बार भी समान स्तर का आवंटन मिलने की वैध अपेक्षा थी। इसी आधार पर उसने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने क्यों दिया था पुनर्विचार का आदेश?
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पूर्व की आवंटन नीति और समझौतों को देखते हुए संबंधित कंपनी को यह उम्मीद थी कि उसे पहले की तरह पर्याप्त मात्रा में एथेनॉल आवंटित किया जाएगा। अदालत ने तेल कंपनियों और संबंधित अधिकारियों को कंपनी के आवेदन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि केंद्र सरकार का तर्क था कि किसी कंपनी को पूर्व में अधिक आवंटन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में भी उसी अनुपात में आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, क्योंकि इससे पूरी राष्ट्रीय आवंटन नीति प्रभावित हो सकती है।
केंद्र सरकार ने क्यों जताई थी चिंता?
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश राष्ट्रीय स्तर पर लागू E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इसी प्रकार के कई मामले देश के विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित हैं। यदि अलग-अलग अदालतों से अलग-अलग आदेश आते हैं तो राष्ट्रीय ईंधन नीति के समान क्रियान्वयन में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।
क्या है E20 नीति और क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण वाली E20 नीति को स्वच्छ ईंधन, ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लागू किया है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन की बिक्री अनिवार्य कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे प्रदूषण कम होगा, किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय मिलेगी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि E20 ईंधन सुरक्षित है और मौजूदा नीति के अनुसार एथेनॉल आपूर्ति समझौते अक्टूबर 2025 में ही संपन्न किए जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को फिलहाल स्थिरता प्रदान करने वाला माना जा रहा है।