सुप्रीम कोर्ट आज देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं से जुड़े अहम मामले में अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कर रही है।
इस मामले में पिछली सुनवाई 29 जनवरी 2026 को हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान विभिन्न राज्यों, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की ओर से दलीलें पेश की गई थीं।
डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि आवारा कुत्तों के हमले में किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है या मौत होती है, तो नगर निकायों के साथ-साथ डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसकी टिप्पणियों को हल्के में न लिया जाए।बेंच ने कहा था कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता साफ दिखाई देती है और जिम्मेदारी तय करने से अदालत पीछे नहीं हटेगी।
कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान
यह मामला 28 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था।
इसके बाद 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में मौजूद सभी आवारा कुत्तों को 8 सप्ताह के भीतर पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का निर्देश दिया था। हालांकि इस आदेश का विरोध होने पर 22 अगस्त 2025 को अदालत ने अपने निर्देश में संशोधन किया।
नसबंदी और टीकाकरण के बाद छोड़े जा सकते हैं कुत्ते
संशोधित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो कुत्ते रेबीज से संक्रमित नहीं हैं और आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
पूरे देश में बढ़ाया गया मामले का दायरा
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया। 7 नवंबर 2025 को जारी अंतरिम आदेश में कोर्ट ने राज्यों और NHAI को निर्देश दिया था कि हाईवे, अस्पताल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के आसपास से आवारा जानवरों को हटाया जाए।