गुजरात के वडोदरा में स्थापित टाटा-एयरबस निर्माण संयंत्र भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनता जा रहा है। यहां तैयार किया गया पहला C-295 विमान केवल एक सैन्य परिवहन विमान नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और रक्षा निर्माण कौशल का प्रतीक माना जा रहा है। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत देश को रक्षा उत्पादन में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारतीय वायुसेना ने लिया तैयारियों का जायजा
भारतीय वायुसेना के डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने हाल ही में वडोदरा संयंत्र का दौरा कर विमान निर्माण और फाइनल असेंबली लाइन का निरीक्षण किया। इस दौरान विमान की उड़ान तैयारी और तकनीकी परीक्षणों की प्रगति की समीक्षा की गई। वायुसेना के अनुसार, विमान अब अपनी पहली उड़ान के लिए लगभग तैयार स्थिति में पहुंच चुका है। इस परियोजना को टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है।
भारत-स्पेन रक्षा समझौते का अहम हिस्सा है परियोजना
भारत और स्पेन के बीच हुए लगभग 21,935 करोड़ रुपये के रक्षा समझौते के तहत कुल 56 C-295 विमानों की खरीद की जा रही है। इनमें से 16 विमान सीधे स्पेन से तैयार अवस्था में मिलेंगे, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। वडोदरा स्थित इस निर्माण इकाई का उद्घाटन 28 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने संयुक्त रूप से किया था। इस परियोजना को भारत के रक्षा उद्योग में निजी क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण भागीदारी में से एक माना जा रहा है।
पुराने एव्रो विमानों की जगह लेगा आधुनिक C-295
C-295 विमान भारतीय वायुसेना के पुराने एव्रो-748 विमानों का स्थान लेगा, जो लंबे समय से सेवा में बने हुए थे। यह आधुनिक मीडियम टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट विमान सैनिकों और सैन्य सामग्री की तेज ढुलाई, मेडिकल इवैक्यूएशन और विशेष सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। इसकी क्षमता एक साथ 70 सैनिकों, 48 पैराट्रूपर्स या 24 मेडिकल स्ट्रेचर को ले जाने की है, जिससे यह आपदा राहत और युद्धकालीन अभियानों दोनों में उपयोगी साबित होगा।
कठिन और दुर्गम इलाकों में भी कर सकेगा ऑपरेशन
इस विमान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कठिन परिस्थितियों में संचालन क्षमता मानी जा रही है। इसमें लगे दो शक्तिशाली Pratt & Whitney PW127G टर्बोप्रॉप इंजन इसे छोटे और कच्चे रनवे से भी उड़ान भरने में सक्षम बनाते हैं। यही कारण है कि यह पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरदराज क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को अधिक प्रभावी बनाएगा। इसके अलावा इसमें भारत में विकसित अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी लगाया जा रहा है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है।
भारत में मजबूत होगा रक्षा और एयरोस्पेस इकोसिस्टम
यह परियोजना केवल विमान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए देश में व्यापक एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। टाटा समूह विमान असेंबली, इंजन और एवियोनिक्स परीक्षण, फ्लाइट टेस्टिंग तथा भविष्य में अपग्रेड और तकनीकी सहायता जैसे कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में उच्च तकनीकी रोजगार, रक्षा अनुसंधान और वैश्विक रक्षा विनिर्माण निवेश को भी नई गति मिलेगी।