नाशिक/मुंबई: Tata Consultancy Services (TCS) के नाशिक यूनिट से जुड़े कथित कांड ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। कर्मचारियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें यौन शोषण, धार्मिक दबाव और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
पहली शिकायत से खुला मामला, देवळाली थाने में दर्ज हुई FIR
मामले की शुरुआत एक महिला कर्मचारी की शिकायत से हुई, जिसने देवळाली पुलिस स्टेशन में रेप का आरोप दर्ज कराया। पीड़िता का कहना है कि एक विवाहित टीम लीडर ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। आरोप है कि यह घटनाएं ऑफिस परिसर और त्र्यंबक रोड के आसपास हुईं।
लगातार सामने आए पीड़ित, कुल 9 FIR दर्ज
पहली शिकायत के बाद अन्य कर्मचारी भी सामने आए, जिसके बाद मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में भी मामले दर्ज किए गए। कुल 9 एफआईआर में 8 महिला और 1 पुरुष कर्मचारी की शिकायत शामिल है।
सात आरोपी गिरफ्तार, HR अधिकारी भी हिरासत में
पुलिस ने इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कई टीम लीडर शामिल बताए जा रहे हैं। एक महिला HR अधिकारी को भी हिरासत में लिया गया है। कुछ आरोपियों को पुलिस रिमांड में भेजा गया है, जबकि एक मुख्य आरोपी को नाशिक रोड सेंट्रल जेल भेजा गया है।
यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप
एफआईआर और पीड़ितों के बयान में कार्यस्थल पर यौन शोषण के कई चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं। इनमें छेड़छाड़, जबरन छूना, अश्लील टिप्पणियां, पीछा करना और शादी का झूठा वादा कर शोषण जैसे आरोप शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ऑफिस के अंदर लॉबी और पेंट्री जैसे स्थानों पर भी घटनाएं हुईं।
कमजोर वर्ग की महिलाओं को बनाया गया निशाना
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ऐसे कर्मचारियों को निशाना बनाते थे जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं। इंटरव्यू के दौरान उनके पारिवारिक और आर्थिक हालात की जानकारी जुटाई जाती थी, जिसके बाद उन्हें टारगेट किया जाता था।
धार्मिक दबाव और जबरन प्रथाओं के आरोप
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कई शिकायतकर्ताओं ने धार्मिक दबाव के आरोप लगाए। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को नमाज पढ़ने, रोजा रखने और यहां तक कि बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया। एक पुरुष कर्मचारी ने भी धार्मिक आधार पर उत्पीड़न और अपमान का आरोप लगाया है।
चार साल से चल रहा था कथित नेटवर्क
पीड़ितों का दावा है कि यह पूरा मामला कोई एक-दो घटनाएं नहीं, बल्कि पिछले करीब चार वर्षों से चल रहा एक संगठित पैटर्न है। आरोप है कि व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए कर्मचारियों को टारगेट किया जाता था।
HR पर शिकायत दबाने के आरोप
कंपनी के HR विभाग पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि शिकायत करने पर उचित कार्रवाई नहीं की गई और मामलों को नजरअंदाज किया गया। एक HR अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतों को हल्के में लेते हुए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
SIT जांच शुरू, पुलिस ने मांगी और शिकायतें
नाशिक पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। टीम मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें CCTV फुटेज, चैट रिकॉर्ड और आंतरिक दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस ने अन्य संभावित पीड़ितों से भी आगे आने की अपील की है।
TCS का बयान: ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ लागू
कंपनी ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या जबरदस्ती के प्रति उसकी “जीरो टॉलरेंस” नीति है। TCS ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है और वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रही है।