मंगलवार की शाम आसमान में एक दुर्लभ और मनमोहक खगोलीय घटना देखने को मिली, जब शुक्र और बृहस्पति ग्रह पृथ्वी से बेहद करीब दिखाई दिए। इस अद्भुत दृश्य ने देशभर में खगोल विज्ञान के शौकीनों और आम लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लखनऊ, जयपुर समेत कई शहरों में लोगों ने खुले आसमान के नीचे इस दुर्लभ महासंयोग का आनंद लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में धूलभरी आंधी और बादलों के कारण यह नजारा साफ दिखाई नहीं दे सका।
सूर्यास्त के बाद चमके दो सबसे उज्ज्वल ग्रह
सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी क्षितिज पर शुक्र और बृहस्पति आकाश के सबसे चमकीले पिंडों के रूप में दिखाई दिए। दोनों ग्रह पृथ्वी से देखने पर इतने करीब नजर आए कि मानो एक-दूसरे के साथ विलीन हो रहे हों। खगोलविदों के अनुसार यह केवल दृष्टि भ्रम है, क्योंकि वास्तविक अंतरिक्ष में दोनों ग्रहों के बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी मौजूद है। फिर भी पृथ्वी से देखने पर यह दृश्य अत्यंत आकर्षक और दुर्लभ माना जाता है।
नासा ने बताया क्यों दिखे इतने करीब
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार शुक्र और बृहस्पति अपनी-अपनी कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं, लेकिन पृथ्वी के दृष्टिकोण से उनकी स्थिति ऐसी बनी कि वे केवल लगभग 1.5 से 2 डिग्री के कोणीय अंतर पर दिखाई दिए। इसी वजह से दोनों ग्रह आसमान में एक-दूसरे के बेहद निकट नजर आए। खगोलीय विज्ञान में इस घटना को ग्रहों का संयोजन या कंजंक्शन कहा जाता है।
अब बुध भी होगा इस दुर्लभ संगम का हिस्सा
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में बुध ग्रह भी शुक्र और बृहस्पति के समीप दिखाई देने लगेगा। 11 जून से 15 जून के बीच सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में इन तीनों ग्रहों की एक सुंदर तिकड़ी देखी जा सकेगी। हालांकि बुध अपेक्षाकृत कम चमकीला ग्रह है और क्षितिज के काफी नीचे रहता है, इसलिए उसे देखने के लिए साफ मौसम और खुला क्षितिज जरूरी होगा।
बिना दूरबीन के भी दिखेगा अद्भुत नजारा
इस खगोलीय घटना की सबसे खास बात यह है कि इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है। साफ आसमान होने पर लोग अपनी खुली आंखों से ही इस दुर्लभ ग्रह-संयोजन का आनंद ले सकते हैं। सूर्यास्त के लगभग 30 से 60 मिनट बाद पश्चिम दिशा की ओर देखने पर शुक्र सबसे चमकीला, उसके पास बृहस्पति और नीचे की ओर बुध दिखाई दे सकता है।
क्या होता है ग्रहों का संयोजन?
ग्रहों का संयोजन तब कहा जाता है जब पृथ्वी से देखने पर दो या अधिक ग्रह आकाश में एक-दूसरे के निकट दिखाई देते हैं। वास्तव में वे अंतरिक्ष में काफी दूर होते हैं, लेकिन उनकी कक्षीय स्थिति और पृथ्वी के साथ बनने वाले कोण के कारण वे एक ही क्षेत्र में दिखाई पड़ते हैं। खगोल विज्ञान में ऐसे संयोजन विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि ये ग्रहों की गति और सौरमंडल की संरचना को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।