नई दिल्ली. देश में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी प्रगति और औसत से कम वर्षा का सीधा असर अब जल संसाधनों पर दिखाई देने लगा है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी ताजा जलाशय भंडारण बुलेटिन के अनुसार, 2 जुलाई 2026 तक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में कुल जीवित जल भंडारण 47.725 बिलियन घन मीटर दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 78.077 बिलियन घन मीटर था। इसका अर्थ है कि वर्तमान जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में केवल 61.13 प्रतिशत रह गया है और लगभग 38.87 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी सप्ताहों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो जल उपलब्धता पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
औसत से 27 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई चिंता
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 1 जून से 4 जुलाई 2026 के बीच देशभर में सामान्य से लगभग 27 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इस अवधि में सामान्य रूप से लगभग 196.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जाती है, जबकि इस वर्ष केवल 144.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। मानसून की यह कमी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव कृषि गतिविधियों, जलाशयों की भराव क्षमता और भूजल पुनर्भरण पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा का असमान वितरण भी कई राज्यों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है।
कृषि और सिंचाई व्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव
देश के अधिकांश बड़े जलाशय सिंचाई परियोजनाओं की जीवनरेखा माने जाते हैं। इन जलाशयों से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराई जाती है। जल भंडारण में आई कमी का असर खरीफ फसलों की सिंचाई, जल प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि मानसून के शेष चरण में पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में किसानों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही जलविद्युत उत्पादन तथा औद्योगिक जलापूर्ति पर भी दबाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय राजधानी समेत कई क्षेत्रों में वर्षा का बड़ा घाटा
कम वर्षा का प्रभाव केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 3 जुलाई के बीच दिल्ली में सामान्यतः लगभग 75.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होती है, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में केवल 38.2 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यानी राजधानी में लगभग 49 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। ऐसी स्थिति जलापूर्ति, भूजल स्तर और शहरी जल प्रबंधन के लिए भी चुनौती बन सकती है, विशेषकर यदि आगामी दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती।
आने वाले सप्ताह होंगे बेहद निर्णायक
जल विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त के शेष मानसूनी सप्ताह देश के जल संसाधनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। यदि आने वाले दिनों में व्यापक और संतुलित वर्षा होती है, तो जलाशयों का स्तर सुधर सकता है और कृषि क्षेत्र को राहत मिल सकती है। दूसरी ओर, यदि वर्षा का अभाव जारी रहा तो कई राज्यों में जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति को लेकर अतिरिक्त रणनीतियां अपनानी पड़ सकती हैं। विशेषज्ञ इस समय जल के विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन और स्थानीय जल संरक्षण उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दे रहे हैं, ताकि भविष्य में संभावित जल संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।