नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA Case) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बुधवार को एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वस्त करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, "आगामी 30 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य सरकार के कर्मचारियों और आंदोलनकारी संगठनों के साथ एक विशेष बैठक करने जा रहे हैं। पूरी उम्मीद है कि इस बैठक के बाद डीए से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान निकल जाएगा।"
शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति पी. के. मिश्रा की पीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की प्रगति को देखते हुए राज्य सरकार को इस पूरे विषय पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) जमा करने का भी निर्देश दिया है।
30 मई की बैठक पर टिकीं राज्य के कर्मचारियों की निगाहें
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी लगातार प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने में जुटे हैं। पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बकाया डीए को लेकर राज्य के कई सरकारी कर्मचारी संगठनों ने लंबा और आक्रामक आंदोलन चलाया था।
अब राज्य की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री ने खुद पहल करते हुए 30 मई को आंदोलनकारी संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। सरकारी कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली इस सीधी बैठक में डीए भुगतान को लेकर कोई बड़ा और सकारात्मक फॉर्मूला निकल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है— 'डीए कर्मचारियों का कानूनी अधिकार'
गौरतलब है कि इसी साल 5 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
शीर्ष अदालत का पिछला फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि महंगाई भत्ता (DA) कोई खैरात या तोहफा नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों का 'कानूनी अधिकार' (Statutory Right) है। अदालत ने तत्कालीन सरकार को एक निश्चित समय सीमा के भीतर कर्मचारियों का पूरा बकाया भत्ता चुकाने का आदेश दिया था।
पिछली सरकार पर लगा था आदेश की अनदेखी का आरोप
कर्मचारी संगठनों का आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने नियममुताबिक उनके बकाया भत्ते का भुगतान नहीं किया और टालमटोल की नीति अपनाई। इसी वजह से यह कानूनी विवाद लगातार खींचता चला गया। लेकिन अब राज्य में सत्ता बदलने और सॉलिसिटर जनरल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए इस सकारात्मक बयान के बाद, बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान लौटती दिख रही है।