Bharatpur: राजस्थान के भरतपुर में राजघराने (Rajasthan News) की लड़ाई बढ़ती जा रही है। पूर्व महाराजा विश्वेंद्र सिंह ने पहले अपनी पत्नी दिव्या सिंह और बेटे अनिरूद्ध सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। अब बेटे ने दावा किया कि पिता मोती महल को बेचना चाहते हैं, इसलिए परिवार में झगड़ा शुरू हुआ है। यह भी आरोप लगाया कि विश्वेंद्र सिंह पत्नी और बेटे को बदनाम कर रहे हैं। फिलहाल, यह विवाद थमता नहीं दिख रहा है। दरअसल, इस विवाद की शुरुआत विश्वेंद्र सिंह की ओर से उपखंड अधिकारी ट्रिब्यूनल भरतपुर में प्रार्थना पत्र देकर वरिष्ठ नागरिक के रूप में पत्नी और बेटे से भरण-पोषण मांगने से हुई। उन्होंने 5 लाख रुपये प्रतिमाह भरण पोषण दिए जाने की मांग की है। बता दें कि विश्वेंद्र की पत्नी दिव्या सिंह भरतपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं और विश्वेंद्र सिंह राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। सबसे पहले जान लेते हैं कि विश्वेंद्र सिंह, उनकी पत्नी और बेटे ने एक दूसरे पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं जिससे ये विवाद और बढ़ता ही जा रहा है...
विश्वेंद्र सिंह ने लगाए ये आरोप
विश्वेंद्र सिंह ने अपनी पत्नी और बेटे पर आरोप लगाए हैं कि दिव्या सिंह और बेटा अनिरुद्ध सिंह उनसे मारपीट करते हैं। भरपेट भोजन नहीं देते। लोगों से मिलने भी नहीं देते हैं। वे घर (मोती महल) छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। खानाबदोश जैसा जीवन जी रहे हैं। कभी सरकारी आवास में तो कभी होटल में रहना पड़ रहा है।
दिव्या सिंह और अनिरूद्ध ने लगाए ये आरोप
इसके जवाब में दिव्या सिंह और अनिरुद्ध सिंह ने आरोप लगाए हैं कि विश्वेंद्र सिंह ने विरासत में मिली हजारों करोड़ की संपत्ति को बेच दिया है। अब वो मोतीमहल को भी बेचना चाहते हैं, जो हम होने नहीं देंगे। एक बार तो विश्वेंद्र सिंह ने एडवांस तक ले लिया था। 99 साल की लीज पर देने की तैयारी भी कर ली थी। अब ये हम लोगों को बदनाम कर रहे हैं।
विश्वेंद्र सिंह ने कोर्ट से की ये मांग
विश्वेंद्र सिंह ने कोर्ट से भरण-पोषण की राहत दिलाने के साथ ही मोती महल, कोठी दरबार निवास, सूरज महल, गोलबाग परिसर में स्थित सभी मंदिर, भवन और देवालय का कब्जा दिलाने की राहत मांगी है। इतना ही नहीं, उन्होंने इस वाद में कोर्ट से कोठी इजलास खास का पत्नी के नाम किया गया दान पत्र निरस्त करने, 9 करोड़ 37 लाख रुपए के गहनों और महल में रखे गए सभी एंटीक और बेशकीमती सामान का कब्जा दिलाने की राहत मांगी है।
विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष
दिव्या सिंह और अनिरुद्ध सिंह की ओर से शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोती महल बेचने के आरोप लगाने के बाद विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए बताया था कि 'मोती महल को बेचने के आरोप झूठे और निराधार हैं। इस ऐतिहासिक विरासत को बेचने की मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता।'
अगली सुनवाई 24 को
बता दें कि मामले में भरतपुर एसडीएम कोर्ट में विश्वेंद्र सिंह की तरफ से पैरवी कर रहे वकील यशवंत सिंह फौजदार ने बताया- सोमवार को सुनवाई में दिव्या सिंह और अनिरुद्ध सिंह की तरफ से पेश हुए वकीलों ने ऑब्जेक्शन पेश करते हुए बताया कि पूर्व महाराजा और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भरण-पोषण का जो वाद कोर्ट में दायर किया है। उसकी सुनवाई का अधिकार इस कोर्ट को नहीं है और यहां ये केस सुनवाई के लिए बनता ही नहीं है। जिसे लेकर विश्वेंद्र सिंह की तरफ से पक्ष रखते हुए वकीलों ने बहस की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अब इस केस में 24 मई की अगली तारीख दी है।
कौन है दिव्या सिंह?
महारानी दिव्या सिंह का जन्म 6 नवंबर 1963 को लखनऊ , उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने15 फरवरी 1989 को महाराज विश्वेंद्र सिंह से शादी की थी। वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा की पूर्व सदस्य हैं। वह भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में राजस्थान के भरतपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गईं।
कौन है विश्वेंद्र सिंह?
महाराजा विश्वेंद्र सिंह का जन्म 23 जून 1962 को भरतपुर में हुआ। एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भरतपुर, राजस्थान के पूर्व शाही परिवार के सदस्य हैं । उन्होंने नवंबर 2021 से दिसंबर 2023 तक राजस्थान सरकार के नागरिक उड्डयन विभाग में पर्यटन कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने दिसंबर 2018 से जुलाई 2020 तक राजस्थान सरकार में पर्यटन और देवस्थान मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने 1993 में नदबई निर्वाचन क्षेत्र और 2013 और 2018 में डीग-कुम्हेर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन बार राजस्थान विधान सभा के सदस्य के रूप में भी कार्य किया। वह 1989, 1999 और 2004 में भरतपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए लोकसभा के लिए चुने गए।