Udaipur E-Bus Service: उदयपुर शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा का विस्तार किया जा रहा है। शहर के लिए स्वीकृत 50 इलेक्ट्रिक बसों में से 35 का आरटीओ पंजीयन पूरा हो चुका है। इनमें से फिलहाल 12 ई-बसें यात्रियों को सेवा दे रही हैं, जबकि पंजीकृत 23 बसों को जल्द ही सड़कों पर उतारने की तैयारी है। बाकी 15 बसों के आने के बाद शहर में स्वीकृत 50 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार हो जाएगा।
23 नई बसें चलने के बाद बदल सकती है रूट व्यवस्था
ई-बसों की संख्या बढ़ने के साथ अब शहर में इनके रूट और फेरों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया जाना है। फिलहाल आचार संहिता लागू होने के कारण बसों का संचालन निर्धारित 10 रूटों पर किया जा रहा है। इन मार्गों पर यात्रियों की संख्या और भीड़ का आकलन करने के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। जिस रूट पर यात्री अधिक होंगे, वहां अतिरिक्त बसें लगाने के साथ फेरों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। इससे ई-बस सेवा को सिर्फ निर्धारित मार्गों तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक यात्री जरूरत के हिसाब से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
जिस रूट पर ज्यादा यात्री, वहां बढ़ेगी बसों की संख्या
ई-बसों के नए संचालन प्लान में यात्रीभार को प्रमुख आधार बनाए जाने की तैयारी है। शहर के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े मार्गों पर बड़ी संख्या में कामगारों की आवाजाही होती है। खास तौर पर मादड़ी-कलड़वास और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र ऐसे रूट हैं, जहां यात्रियों का दबाव अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में इन क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार बसों की संख्या और फेरों में बढ़ोतरी की जा सकती है।
कॉलेज रूट पर भी बढ़ सकती है बसों की फ्रीक्वेंसी
लंबे रूटों पर कॉलेज विद्यार्थियों की आवाजाही भी काफी रहती है। सुबह और दोपहर के समय इन मार्गों पर यात्री संख्या बढ़ने के कारण बसों की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी को देखते हुए ई-बस संचालन की नई व्यवस्था में पीक टाइम, यात्री संख्या और रूट की वास्तविक जरूरत को ध्यान में रखने की तैयारी है। यानी भविष्य में बसों की संख्या केवल रूट की लंबाई के आधार पर नहीं, बल्कि उस मार्ग पर यात्रियों की मांग के हिसाब से निर्धारित की जा सकती है।
लंबे रूट पर दोनों तरफ से चलाने की योजना
यात्रियों को लंबे रूट पर बस के इंतजार में ज्यादा समय न बिताना पड़े, इसके लिए दोनों छोर से बसें संचालित करने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर कुछ मौजूदा रूटों को आगे तक बढ़ाने और कुछ मार्गों में आंशिक बदलाव करने की संभावना भी है। रूट के पुनर्गठन के दौरान संबंधित इलाकों के लोगों और यात्रियों से राय-मशविरा किए जाने की तैयारी है, ताकि नई व्यवस्था वास्तविक जरूरत के मुताबिक बनाई जा सके।
धोल की पाटी के बाद अब 3 नए टर्मिनल तैयार करने की तैयारी
ई-बसों की संख्या बढ़ने के साथ इनके संचालन और पार्किंग के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में टर्मिनल विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। फिलहाल धोल की पाटी में ई-बसों का मुख्य डिपो मौजूद है। अब शहर के तीन अन्य स्थानों पर टर्मिनल तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अंबेरी में जगह तय
अंबेरी में ई-बस टर्मिनल के लिए जगह फाइनल हो चुकी है। इससे शहर के इस हिस्से में बसों के संचालन और पार्किंग को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
साइफन बस स्टैंड पर भी मिलेगा टर्मिनल
साइफन बस स्टैंड पर भी ई-बसों के लिए स्थान उपलब्ध हो गया है। यहां टर्मिनल तैयार होने के बाद संबंधित रूटों पर बसों को संचालित करना आसान होगा।
प्रतापनगर में जमीन की तलाश जारी
प्रतापनगर में ई-बस टर्मिनल के लिए अभी जगह की तलाश की जा रही है। स्थान तय होने के बाद यहां भी संचालन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
रात में अलग-अलग हिस्सों में खड़ी हो सकेंगी बसें
नए टर्मिनल बनने का एक बड़ा फायदा यह होगा कि ई-बसों को रात में केवल मुख्य डिपो तक वापस लाने की जरूरत कम हो सकती है। इन्हें शहर के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए टर्मिनल पर खड़ा किया जा सकेगा। इससे अगले दिन बसों को संबंधित रूट पर समय से रवाना करने में आसानी होगी और संचालन व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
50 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार होने के बाद बढ़ेगी सुविधा
उदयपुर में 50 इलेक्ट्रिक बसों का पूरा बेड़ा तैयार होने के बाद शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को विस्तार मिलने की उम्मीद है। फिलहाल 12 बसों के संचालन के बाद 23 और पंजीकृत बसों को सेवा में शामिल करने की तैयारी है। इसके बाद शेष 15 बसें आने पर स्वीकृत पूरा बेड़ा तैयार हो जाएगा। यात्रीभार के आधार पर रूट और फेरे तय होने से औद्योगिक क्षेत्रों, कॉलेज रूट और शहर के अन्य प्रमुख हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को और मजबूत किया जा सकता है।