हिंदू धर्म में अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय पुरुषोत्तम मास माना गया है। इस मास में किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। जब इसी अधिकमास में भगवान गणेश को समर्पित वरदा विनायक चतुर्थी आती है, तब इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक गणपति की उपासना करने से भक्तों के जीवन से बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
भविष्य पुराण में बताया गया है विशेष महत्व
धार्मिक ग्रंथ भविष्य पुराण में वरदा चतुर्थी का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और पूजन करने वाला व्यक्ति भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त करता है। यह भी कहा जाता है कि अधिकमास की इस चतुर्थी का पुण्य सामान्य बारह चतुर्थियों के पुण्य से भी अधिक फलदायी माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन की गई पूजा से धन, संतान, आरोग्य और यश की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
कब है वरदा विनायक चतुर्थी 2026
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट से होगा और इसका समापन 20 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर यह व्रत 20 मई को रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए श्रद्धालु इसी दिन भगवान गणेश का व्रत और पूजन करेंगे।
ऐसे करें वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत और पूजन
इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल पर गणपति की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें दूर्वा, सिंदूर, पुष्प, फल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय माने जाते हैं, इसलिए इसका भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। इसके पश्चात गणेश मंत्रों का जाप और व्रत कथा का पाठ किया जाता है। शाम के समय पुनः पूजा और आरती करने के बाद श्रद्धालु व्रत का पारण करते हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी है परंपरा
कई स्थानों पर वरदा विनायक चतुर्थी के दिन रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान गणेश और चंद्रदेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु दिनभर संयम और सात्विकता का पालन करते हुए भगवान गणपति का ध्यान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और समृद्धि लेकर आता है।
विघ्नहर्ता की कृपा पाने का माना जाता है दुर्लभ अवसर
अधिकमास में आने वाली यह चतुर्थी केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं मानी जाती, बल्कि इसे आत्मिक शुद्धि और शुभ फल प्राप्ति का विशेष अवसर भी कहा गया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से की गई गणपति आराधना जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सफलता और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करती है।