ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई 2026 (शनिवार) से हो रही है और इसका समापन 29 जून 2026 (सोमवार) को होगा। इस बार अधिकमास के कारण यह माह 59 दिनों का रहेगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है।
सूर्य देव को समर्पित पवित्र महीना
ज्येष्ठ माह को भगवान सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस समय सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है और इसे ऊर्जा, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला काल माना जाता है।
अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का महत्व
इस बार ज्येष्ठ माह में अधिकमास पड़ने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, जप और भक्ति कार्यों का विशेष फल मिलता है।
भगवान विष्णु की पूजा का महत्व
इस पावन माह में भगवान विष्णु की आराधना को अत्यंत शुभ माना जाता है।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप
जल में भगवान विष्णु की प्रतिमा रखकर पूजा (जलस्थ विष्णु पूजा)
नियमित भक्ति से सकारात्मक फल की प्राप्ति
सूर्य देव की उपासना से लाभ
- इस महीने में सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है।
- रोजाना सूर्य को अर्घ्य देना
- “ॐ सूर्याय नमः” और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप
- तांबे के पात्र से जल अर्पित करना
- मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य और आत्मबल में वृद्धि होती है।
हनुमान जी की आराधना और बड़ा मंगल
- ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को “बड़ा मंगल” या “बुढ़वा मंगल” कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी माह में भगवान राम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी।
- इस दिन
- हनुमान चालीसा का पाठ
- सुंदरकांड का पाठ
- भक्ति और सेवा कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।