हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह 2 मई से प्रारंभ होकर 29 जून तक रहेगा। अधिक मास के कारण इस बार यह महीना सामान्य अवधि से लंबा होकर कुल 59 दिनों का हो जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 17 मई से 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह अवधि अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है और इस दौरान किए गए जप, तप, दान तथा धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष फल प्राप्त होता है।
ज्येष्ठ मास का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास को हिंदू पंचांग का तीसरा महीना माना जाता है और इसका संबंध मंगल ग्रह से जोड़ा गया है। मान्यता है कि इस माह की पूर्णिमा पर ज्येष्ठा नक्षत्र का विशेष संयोग बनने के कारण इसका नाम ज्येष्ठ पड़ा। शास्त्रों में इस पूरे कालखंड को पुण्य संचय, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी बताया गया है। यही कारण है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
पुरुषोत्तम मास में बढ़ जाता है विष्णु पूजा का महत्व
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है। इस दौरान श्रीहरि विष्णु की उपासना, गीता पाठ, कथा श्रवण, दान-पुण्य और सत्संग करना अत्यंत शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए पुण्य कार्य व्यक्ति को ग्रह दोषों से राहत दिलाने में भी सहायक होते हैं।
निर्जला एकादशी और गंगा दशहरा बढ़ाएंगे माह का महत्व
ज्येष्ठ माह में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी पड़ते हैं, जिनका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। इस दौरान निर्जला एकादशी, गंगा दशहरा, वट सावित्री व्रत, नारद जयंती, प्रदोष व्रत और पूर्णिमा जैसे कई प्रमुख पर्व आएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत समस्त एकादशियों के समान फल देने वाला माना गया है, जबकि गंगा दशहरा को पापों के नाश और पुण्य प्राप्ति का पर्व कहा गया है।
हनुमान भक्ति और मंगलवार व्रत का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में ही भगवान श्रीराम और हनुमान जी का दिव्य मिलन हुआ था। इसी कारण इस पूरे महीने में मंगलवार का व्रत और बजरंगबली की विशेष पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु इस दौरान हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और राम नाम का जप कर विशेष कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन के कष्ट, भय और बाधाओं में कमी आती है।
जल दान और सेवा कार्यों का मिलता है विशेष पुण्य
ज्येष्ठ माह को भीषण गर्मी का समय माना जाता है, इसलिए शास्त्रों में इस दौरान जलदान को महादान कहा गया है। जरूरतमंदों, पशु-पक्षियों और राहगीरों को पानी पिलाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही पेड़-पौधों को जल अर्पित करना, छायादार वृक्ष लगाना और सेवा कार्य करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसे कार्यों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
जानिए कब शुरू और समाप्त होगा ज्येष्ठ मास
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई 2026 को कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि से होगी, जिसका आरंभ रात 10 बजकर 52 मिनट पर माना गया है। वहीं 29 जून 2026 को पूर्णिमा तिथि सुबह 3 बजकर 6 मिनट पर प्रारंभ होगी और इसी के साथ ज्येष्ठ माह का समापन माना जाएगा। अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा, जिससे यह पूरा माह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण बन गया है।