Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि का इंतजार कर रहे भक्तों के लिए इस बार का पर्व धार्मिक आस्था के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास माना जा रहा है। पंचांग गणना के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार को कलश स्थापना के साथ होगी। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का समापन 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ होगा, जबकि 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसी दौरान गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति को ज्योतिष में गजकेसरी योग से जोड़ा जा रहा है।
नवरात्रि में क्यों खास माना जा रहा है गजकेसरी योग?
ज्योतिष शास्त्र में गुरु और चंद्रमा की विशेष स्थिति से बनने वाले गजकेसरी योग को शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता के अनुसार, जब गुरु और चंद्रमा एक-दूसरे से केंद्र भाव में स्थित हों या विशेष परिस्थितियों में उनकी युति बने, तब गजकेसरी योग का निर्माण माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को बुद्धि, ज्ञान, प्रतिष्ठा, आर्थिक उन्नति और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। इस वजह से नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व के दौरान बनने वाली इस ग्रह स्थिति को कई राशियों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। हालांकि, किसी भी ज्योतिषीय योग का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग माना जाता है।
गजकेसरी योग के दौरान कौन से उपाय किए जा सकते हैं?
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ कुछ पारंपरिक उपाय करने की भी मान्यता है। इनमें पीले रंग की वस्तुओं का इस्तेमाल और गुरु से संबंधित दान को शुभ माना जाता है।
पीला नैवेद्य: मां दुर्गा को बेसन के लड्डू या केसर वाली खीर का भोग लगाया जा सकता है।
मंत्र जाप: प्रतिदिन ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप या दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की मान्यता है।
पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार या अष्टमी-नवमी के अवसर पर चने की दाल, हल्दी या पीले वस्त्र दान किए जा सकते हैं।
मेष राशि: करियर में मिल सकता है फायदा
मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक माना जा रहा है। कामकाज में आगे बढ़ने और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं। ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ने की संभावना है, वहीं रिश्तों में भी मधुरता आ सकती है।
उपाय: मां स्कंदमाता को लाल गुलाब और बेसन के लड्डू अर्पित करें। इसके साथ ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करें।
वृषभ राशि: अटका धन मिलने के संकेत
वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में राहत के संकेत बताए जा रहे हैं। लंबे समय से रुका हुआ धन मिलने की संभावना बन सकती है। खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान देना फायदेमंद रहेगा। दांपत्य जीवन में भी मधुरता बढ़ सकती है।
उपाय: मां महागौरी को सफेद चंदन और मिश्री अर्पित करें। छोटी कन्याओं को खीर खिलाने की मान्यता है।
मिथुन राशि: नए प्रोजेक्ट से बढ़ेगा आत्मविश्वास
मिथुन राशि के जातकों को नए प्रोजेक्ट या काम के अवसर मिल सकते हैं। यात्रा के योग भी बन सकते हैं। मानसिक तनाव कम होने और निजी रिश्तों में भरोसा बढ़ने की संभावना जताई गई है।
उपाय: मां ब्रह्मचारिणी को दूर्वा और हरी इलायची अर्पित करें। गुरु मंत्र का 108 बार जाप करें।
कर्क राशि: मान-सम्मान में बढ़ोतरी के योग
कर्क राशि के लिए गजकेसरी योग को विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। करियर और सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। विवाह योग्य जातकों के लिए रिश्ते की बात आगे बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।
उपाय: मां शैलपुत्री को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पूजा स्थल पर चांदी का सिक्का रखने की मान्यता है।
सिंह राशि: कारोबार में लाभ की संभावना
सिंह राशि के जातकों के लिए व्यापारिक दृष्टि से समय अच्छा रह सकता है। कारोबार में लाभ के अवसर मिल सकते हैं। स्वास्थ्य को लेकर मौसम संबंधी परेशानियों से सावधान रहने की सलाह दी गई है। जीवनसाथी के साथ धार्मिक यात्रा का योग भी बन सकता है।
उपाय: मां कालरात्रि को गुड़हल का फूल अर्पित करें और पीले फलों का दान करें।
कन्या राशि: निवेश से मिल सकता है लाभ
कन्या राशि वालों के लिए आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक संकेत हैं। निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना बताई गई है। हालांकि सिरदर्द जैसी छोटी स्वास्थ्य परेशानियों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है। जीवनसाथी की सलाह कामकाज में मददगार हो सकती है।
उपाय: मां चंद्रघंटा को हरे फल अर्पित करें और जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल दान करें।
तुला राशि: कार्यक्षेत्र में मिलेगी तारीफ
तुला राशि के जातकों को ऑफिस या कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है। स्वास्थ्य के लिहाज से समय अनुकूल रहने की संभावना है। प्रेम संबंधों में भी कोई नया बदलाव देखने को मिल सकता है।
उपाय: मां कात्यायनी को इत्र और सफेद फूल अर्पित करें। केसर की खीर का भोग लगाएं।
वृश्चिक राशि: आय के नए रास्ते खुलेंगे
वृश्चिक राशि वालों के लिए कमाई के नए स्रोत बनने की संभावना है। हालांकि बढ़ते खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। रिश्तों में अगर कोई गलतफहमी चल रही है तो बातचीत के जरिए उसे दूर करने का प्रयास करें।
उपाय: मां सिद्धिदात्री को लाल चुनरी अर्पित करें। तिजोरी में हल्दी की एक साबुत गांठ रखने की मान्यता है।
धनु राशि: भाग्य का मिल सकता है साथ
धनु राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला माना जा रहा है। पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिलने की संभावना जताई गई है। दांपत्य जीवन में भी सुख और सामंजस्य बढ़ सकता है।
उपाय: मां कुष्मांडा को पीले फूल और चने की दाल अर्पित करें। दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
मकर राशि: प्रॉपर्टी से जुड़े काम आगे बढ़ सकते हैं
मकर राशि वालों के लिए अचल संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रगति हो सकती है। वहीं जोड़ों से संबंधित परेशानी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जीवनसाथी से भावनात्मक सहयोग मिल सकता है।
उपाय: मां कालरात्रि के सामने तिल के तेल का दीपक जलाएं और सूखे मेवों का भोग लगाएं।
कुंभ राशि: चुनौतियां बन सकती हैं सफलता की वजह
कुंभ राशि के जातकों को करियर में नई जिम्मेदारियां या चुनौतियां मिल सकती हैं। इनका सही तरीके से सामना करने पर लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य के लिए नियमित दिनचर्या बनाए रखना जरूरी माना गया है। रिश्तों में संवाद बनाए रखें।
उपाय: मां ब्रह्मचारिणी को चमेली का इत्र अर्पित करें और साबुत उड़द की दाल का दान करें।
मीन राशि: ज्ञान और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत
मीन राशि वालों के लिए यह समय ज्ञान और आर्थिक स्थिति दोनों के लिहाज से सकारात्मक बताया जा रहा है। बैंक बैलेंस में वृद्धि के साथ मानसिक शांति मिल सकती है। प्रेम संबंधों में भी नजदीकियां बढ़ने की संभावना है।
उपाय: मां चंद्रघंटा को केसर का तिलक लगाएं और पीली मिठाई का भोग अर्पित करें।
नवरात्रि में इस तरह करें मां दुर्गा की दैनिक पूजा
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं। सामान्य पूजा क्रम में स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठने और संकल्प लेने की परंपरा है।
1. संकल्प और आसन
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपनी मनोकामना के साथ पूजा का संकल्प लें।
2. दीप प्रज्वलित करें
मां दुर्गा के समक्ष घी का दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें।
3. देवी को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
रोली, अक्षत, चंदन और अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल अर्पित करें। राशि के अनुसार बताए गए पुष्प और नैवेद्य का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
4. भोग और मंत्र जाप
मां को भोग लगाने के बाद ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती या अन्य देवी पाठ भी कर सकते हैं।
5. आरती के साथ पूजा करें पूर्ण
पूजा के अंत में कपूर से मां दुर्गा की आरती करें और क्षमा प्रार्थना के साथ पूजा संपन्न करें।
धार्मिक मान्यताओं के साथ जरूरी है सावधानी
गजकेसरी योग और राशि अनुसार बताए गए फल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों का प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली, दशा और अन्य ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर अलग माना जाता है। इसलिए इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।