सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। वर्षभर आने वाली 24 एकादशियों में आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी सबसे पुण्यदायी व्रतों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे सुख-समृद्धि, आरोग्य तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस बार पंचांग के अनुसार तिथि क्षय होने के कारण यह व्रत विशेष महत्व रखता है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी की सही तिथि, पूजा-विधि, संकल्प, पारण का समय और इस व्रत से मिलने वाले पुण्य फल के बारे में।
क्यों खास मानी जाती है योगिनी एकादशी?
आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी निर्जला एकादशी और देवशयनी एकादशी के बीच आने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों में इसे पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और नियम के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
इस बार क्यों हुआ तिथि क्षय?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष योगिनी एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:17 बजे शुरू होगी और 11 जुलाई को सुबह 5:23 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि यह तिथि किसी भी दिन के सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है, इसलिए इसे तिथि क्षय की स्थिति माना गया है। शास्त्रीय नियमों के अनुसार ऐसे में योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को ही किया जाएगा।
योगिनी एकादशी की सरल पूजा-विधि
योगिनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान भगवान श्रीहरि की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल अथवा शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद पीले पुष्प, चंदन, धूप, दीप, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें। यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु की आरती कर उनसे जाने-अनजाने हुए अपराधों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
योगिनी एकादशी के दिन सात्विक जीवनशैली अपनाना शुभ माना जाता है। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। जरूरतमंद लोगों को दान करना और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करना भी इस दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कब करें व्रत का पारण?
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर करना शास्त्र सम्मत माना गया है। इस वर्ष योगिनी एकादशी का पारण 11 जुलाई, शनिवार को दोपहर 1:45 बजे से शाम 4:29 बजे के बीच किया जाएगा। इसी अवधि में व्रत खोलना शुभ और फलदायी माना गया है।
योगिनी एकादशी व्रत का क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। यह व्रत जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करता है। मान्यता यह भी है कि इस व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मृत्यु के बाद उत्तम लोक अथवा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
FAQs
Q1. योगिनी एकादशी 2026 कब है?
योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।
Q2. योगिनी एकादशी का पारण कब होगा?
11 जुलाई 2026 को दोपहर 1:45 बजे से शाम 4:29 बजे तक पारण किया जाएगा।
Q3. योगिनी एकादशी के दिन किस भगवान की पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
Q4. योगिनी एकादशी का व्रत करने से क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत से पापों का नाश होता है और 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
Q5. इस बार योगिनी एकादशी विशेष क्यों है?
इस वर्ष तिथि क्षय होने के कारण योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को ही किया जाएगा।