पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पुलिस को सबसे महत्वपूर्ण सुराग उस समय मिला, जब मुख्य आरोपियों में शामिल चेतन चौधरी घटना वाले दिन लगभग 640 मिनट तक डिजिटल माध्यमों से पूरी तरह गायब रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने जानबूझकर अपने मोबाइल का इंटरनेट बंद कर दिया और अपना निजी मोबाइल दुकान पर छोड़कर एक कर्मचारी का मोबाइल साथ ले गया, ताकि उसकी वास्तविक लोकेशन का पता न लगाया जा सके। हालांकि जांच अधिकारियों का कहना है कि यही असामान्य गतिविधि अंततः उसके खिलाफ सबसे मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों में बदल गई और संदेह की दिशा सीधे उसी तक पहुंच गई।
कॉल रिकॉर्ड ने उजागर किए दोनों आरोपियों के गहरे संपर्क
पुलिस की जांच में सामने आया कि वर्ष की शुरुआत से लेकर घटना तक आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच लगभग 2,004 बार बातचीत हुई। औसतन प्रतिदिन आठ से दस कॉल किए जाने और लगभग 238 घंटे तक दोनों के बीच बातचीत होने का दावा जांच अधिकारियों ने किया है। पुलिस के अनुसार हत्या की घटना के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा। कॉल विवरण, संदेशों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि कथित साजिश की पूरी कड़ी को अदालत के समक्ष प्रमाण सहित प्रस्तुत किया जा सके।
दुर्घटना का रूप देने की कथित योजना पर गहराया संदेह
जांच के अनुसार जून महीने में लोहागढ़ किले की ट्रैकिंग यात्रा के दौरान केतन अग्रवाल की खाई में गिरने से मृत्यु हुई थी, जिसे प्रारंभिक रूप से दुर्घटना माना गया था। लेकिन बाद में सामने आए तथ्यों ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला दिया। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित रूप से पहले से योजना बनाकर इस घटना को अंजाम दिया और इसे प्राकृतिक दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी डिजिटल एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर रही हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
मोबाइल पर कथित खोज और जांच एजेंसियों की पड़ताल
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल उपकरणों पर कथित रूप से अपराध से जुड़े विभिन्न तरीकों की जानकारी खोजी थी। जांच अधिकारियों का दावा है कि लोहागढ़ किले का चयन भी पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इन दावों की पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों और आगे की विवेचना के बाद ही होगी। पुलिस इस पूरे मामले में डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण को महत्वपूर्ण आधार मानकर आगे बढ़ रही है।
परिजनों के संदेह ने जांच की दिशा बदल दी
केतन अग्रवाल के परिजनों का कहना है कि घटना के बाद सिया गोयल का व्यवहार उन्हें सामान्य नहीं लगा। परिवार के अनुसार जहां सभी सदस्य गहरे सदमे में थे, वहीं सिया अपेक्षाकृत सामान्य दिखाई दे रही थी और पुलिस अधिकारियों से आगे की कानूनी प्रक्रिया के संबंध में लगातार जानकारी ले रही थी। परिवार के संदेह के बाद पुलिस ने मामले की दोबारा गहन जांच शुरू की, जिसके दौरान कई नए डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य सामने आए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर जांच का दायरा लगातार विस्तृत किया गया।
अदालत में साक्ष्यों की होगी अंतिम परीक्षा
यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि आधुनिक अपराध जांच में डिजिटल साक्ष्य, कॉल विवरण, मोबाइल गतिविधियां और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कितने महत्वपूर्ण हो चुके हैं। हालांकि पुलिस ने कई अहम दावे किए हैं, लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जाता जब तक न्यायालय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध न कर दे। अब इस चर्चित मामले में सभी की निगाहें आगे की जांच, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायालय के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।