वाराणसी. झुलसाने वाली गर्मी और नौतपा की शुरुआत के साथ ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। 25 मई 2026 से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाले नौतपा काल के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के धाम पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही विशेष व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है। मंदिर न्यास का उद्देश्य यह है कि भक्त बिना किसी असुविधा के बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें और भीषण गर्मी का प्रभाव उनकी आस्था यात्रा पर न पड़े।
फलों के रस और शीतल पेयों से होगा बाबा का विशेष अभिषेक
नौतपा अवधि में भगवान श्री काशी विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार और अभिषेक सनातन परंपराओं के अनुरूप विभिन्न फलों के रस तथा शीतल पेय पदार्थों से किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है बल्कि ग्रीष्म ऋतु में भगवान को शीतलता अर्पित करने की भारतीय धार्मिक परंपरा का भी प्रतीक है। श्रद्धालुओं के लिए यह विशेष अनुष्ठान आकर्षण का केंद्र रहेगा और धाम के धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बनाएगा।
जर्मन हैंगर, कैनोपी और मिस्ट फैन से मिलेगी राहत
भीषण तापमान से बचाव के लिए धाम परिसर और दर्शन कतार मार्ग के विभिन्न हिस्सों में जर्मन हैंगर तथा कैनोपी लगाए गए हैं। इन संरचनाओं के भीतर मिस्ट फैन स्थापित किए गए हैं, जो पानी की महीन फुहारों के माध्यम से वातावरण को ठंडा बनाए रखेंगे। इससे लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से काफी राहत मिलेगी। मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था दर्शनार्थियों के अनुभव को अधिक सहज और आरामदायक बनाएगी।
बच्चों और परिवारों के लिए विशेष सुविधाए
धाम में आने वाले छोटे बच्चों और परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बच्चों को बिस्कुट उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि लंबे समय तक कतार में रहने के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके अतिरिक्त परिवारों के लिए विश्राम और पेयजल सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि हर आयु वर्ग के श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में दर्शन कर सकें।
ओआरएस, ग्लूकोज और गुड़ से होगा स्वास्थ्य संरक्षण
गर्मी और निर्जलीकरण के खतरे को देखते हुए धाम परिसर के विभिन्न स्थानों पर ओआरएस, ग्लूकोज और गुड़ की व्यवस्था की गई है। यह कदम विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो दूर-दराज़ क्षेत्रों से यात्रा कर धाम पहुंचते हैं। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं की आशंका को कम किया जा सके।
पेयजल और जूट मैट से बढ़ाई गई सुविधाए
श्रद्धालुओं को स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए धाम परिसर में 19 स्थानों पर वाटर कूलर तथा 10 स्थानों पर अतिरिक्त वॉटर कंटेनर लगाए गए हैं। वहीं कतार मार्ग में उच्च गुणवत्ता वाले जूट मैट बिछाए गए हैं, जिससे गर्म फर्श पर खड़े रहने की समस्या से राहत मिलेगी। ये व्यवस्थाएं विशेष रूप से दोपहर के समय दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी साबित होंगी।
स्वच्छता और अनुशासन पर विशेष जोर
पूरे धाम क्षेत्र में निरंतर स्वच्छता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है। नियमित साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन का कार्य लगातार संचालित किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन और मंदिर कर्मचारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा संयम, अनुशासन और श्रद्धा के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करें। झुलसाने वाली गर्मी और नौतपा की शुरुआत के साथ ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। 25 मई 2026 से शुरू होकर 2 जून तक चलने वाले नौतपा काल के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के धाम पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही विशेष व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है। मंदिर न्यास का उद्देश्य यह है कि भक्त बिना किसी असुविधा के बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकें और भीषण गर्मी का प्रभाव उनकी आस्था यात्रा पर न पड़े।
फलों के रस और शीतल पेयों से होगा बाबा का विशेष अभिषेक
नौतपा अवधि में भगवान श्री काशी विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार और अभिषेक सनातन परंपराओं के अनुरूप विभिन्न फलों के रस तथा शीतल पेय पदार्थों से किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है बल्कि ग्रीष्म ऋतु में भगवान को शीतलता अर्पित करने की भारतीय धार्मिक परंपरा का भी प्रतीक है। श्रद्धालुओं के लिए यह विशेष अनुष्ठान आकर्षण का केंद्र रहेगा और धाम के धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बनाएगा।
जर्मन हैंगर, कैनोपी और मिस्ट फैन से मिलेगी राहत
भीषण तापमान से बचाव के लिए धाम परिसर और दर्शन कतार मार्ग के विभिन्न हिस्सों में जर्मन हैंगर तथा कैनोपी लगाए गए हैं। इन संरचनाओं के भीतर मिस्ट फैन स्थापित किए गए हैं, जो पानी की महीन फुहारों के माध्यम से वातावरण को ठंडा बनाए रखेंगे। इससे लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से काफी राहत मिलेगी। मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था दर्शनार्थियों के अनुभव को अधिक सहज और आरामदायक बनाएगी।
बच्चों और परिवारों के लिए विशेष सुविधाएं
धाम में आने वाले छोटे बच्चों और परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बच्चों को बिस्कुट उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि लंबे समय तक कतार में रहने के दौरान उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके अतिरिक्त परिवारों के लिए विश्राम और पेयजल सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि हर आयु वर्ग के श्रद्धालु सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में दर्शन कर सकें।
ओआरएस, ग्लूकोज और गुड़ से होगा स्वास्थ्य संरक्षण
गर्मी और निर्जलीकरण के खतरे को देखते हुए धाम परिसर के विभिन्न स्थानों पर ओआरएस, ग्लूकोज और गुड़ की व्यवस्था की गई है। यह कदम विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है जो दूर-दराज़ क्षेत्रों से यात्रा कर धाम पहुंचते हैं। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं की आशंका को कम किया जा सके।
पेयजल और जूट मैट से बढ़ाई गई सुविधाएं
श्रद्धालुओं को स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए धाम परिसर में 19 स्थानों पर वाटर कूलर तथा 10 स्थानों पर अतिरिक्त वॉटर कंटेनर लगाए गए हैं। वहीं कतार मार्ग में उच्च गुणवत्ता वाले जूट मैट बिछाए गए हैं, जिससे गर्म फर्श पर खड़े रहने की समस्या से राहत मिलेगी। ये व्यवस्थाएं विशेष रूप से दोपहर के समय दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी साबित होंगी।
स्वच्छता और अनुशासन पर विशेष जोर
पूरे धाम क्षेत्र में निरंतर स्वच्छता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है। नियमित साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन का कार्य लगातार संचालित किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके। मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन और मंदिर कर्मचारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा संयम, अनुशासन और श्रद्धा के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करें।