अयोध्या: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपये की चोरी के दावों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मंदिर में चढ़ावे के करीब 7 करोड़ रुपये की चोरी के आरोपों के बीच एक कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये नकद बरामद होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने की मांग की है। वहीं विपक्ष ने भी मामले में पारदर्शी जांच की मांग करते हुए ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठाए हैं।
कर्मचारी के घर से मिले ₹10 लाख, गोबर के ढेर में छिपाकर रखी थी नकदी
सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने का कार्य करने वाले कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। जांच टीम को कुछ रकम घर की आलमारी और बक्सों में मिली, जबकि बड़ी मात्रा में नकदी गोबर के ढेर में दबाकर छिपाई गई थी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बरामद राशि का स्रोत क्या है और इसका कथित चढ़ावा चोरी मामले से कोई सीधा संबंध है या नहीं। जांच एजेंसियां नकदी के स्रोत और उसके इस्तेमाल की पड़ताल कर रही हैं।
4-5 महीने पहले मिली थी मंदिर में नौकरी
लवकुश मिश्रा अयोध्या के रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव का निवासी है। उसके पिता बच्चूलाल ने स्वीकार किया कि उनके घर से नकदी बरामद हुई है। उन्होंने बताया कि लवकुश पिछले चार से पांच महीने से राम मंदिर में कार्यरत था और इसी दौरान जांच टीम उनके घर पहुंची। परिजनों का दावा है कि बरामद धनराशि और परिवार द्वारा बनाए जा रहे मकान का आपस में कोई संबंध नहीं है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर में नौकरी मिलने के बाद लवकुश की आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला था। गांव में वह खुले हाथ से खर्च करता था और कई मौकों पर हजारों रुपये खर्च करने की चर्चा भी रही है।
साला भी हिरासत में, रिश्तेदारी के जरिए मिली थी नौकरी
सूत्रों के अनुसार लवकुश की नियुक्ति उसके ससुर के माध्यम से हुई थी। उसका साला अनुकल्प मिश्रा पहले से मंदिर में कार्यरत था। बताया जा रहा है कि फिलहाल लवकुश और अनुकल्प दोनों पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या मंदिर की चढ़ावा व्यवस्था में किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है या मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित है।
राम मंदिर ट्रस्ट ने की SIT जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रकरण की जांच विशेष जांच दल (SIT) से कराने का अनुरोध किया है। ट्रस्ट का मानना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही विवाद पर विराम लग सकेगा और लोगों का विश्वास कायम रहेगा। इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व नौकरशाह Nripendra Misra अयोध्या पहुंचे और निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में शामिल हुए। हालांकि उन्होंने चढ़ावा विवाद पर कोई सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया।
सपा ने उठाए सवाल, इस्तीफे की मांग
समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री Pawan Pandey ने वीडियो जारी कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन ट्रस्ट सदस्यों और पदाधिकारियों के नाम आरोपों में सामने आए हैं, उन्हें नैतिकता के आधार पर जांच पूरी होने तक अपने पद छोड़ देने चाहिए। पवन पांडे ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो लोगों के मन में कई सवाल खड़े होंगे।
आस्था के केंद्र पर उठे सवाल, जांच पर टिकी निगाहें
राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है और यहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में चढ़ावे की राशि को लेकर सामने आए आरोपों ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें संभावित SIT जांच और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों में सच्चाई सामने आती है तो यह मामला मंदिर प्रशासन और चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।