लखनऊ - उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए कहा, “लाल टोपी और नीला लिबास, काली कारतूतें ढकने का नया प्रयास। मौर्य की इस टिप्पणी को सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को लेकर भाजपा के हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
लाल टोपी और नीले लिबास के सियासी मायने
समाजवादी पार्टी की पहचान लंबे समय से लाल रंग और लाल टोपी से जुड़ी रही है। वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में नीला रंग बहुजन और दलित राजनीति का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मौर्य के बयान में इन दोनों रंगों का जिक्र सपा की बदलती सामाजिक रणनीति पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को साथ लाने के लिए PDA की राजनीति को प्रमुखता देते रहे हैं। पार्टी की कोशिश अपने पारंपरिक समर्थन आधार से आगे बढ़कर अन्य पिछड़ी और दलित जातियों में भी संगठनात्मक तथा चुनावी पकड़ मजबूत करने की रही है।
‘काली कारतूतें’ कहकर पुराने शासन पर निशाना
केशव मौर्य के बयान का सबसे तीखा हिस्सा “काली कारतूतें ढकने” वाला है। भाजपा लंबे समय से समाजवादी पार्टी के पूर्व शासनकाल को कानून-व्यवस्था, अपराध और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घेरती रही है।
भाजपा नेताओं का आरोप रहा है कि सपा सरकार के दौरान अपराध और माफिया को संरक्षण मिला। वहीं समाजवादी पार्टी इन आरोपों को खारिज करती रही है और मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में बेरोजगारी, महंगाई, भर्ती परीक्षाओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सवाल उठाती रही है।
PDA के जवाब में भाजपा का सामाजिक समीकरण
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े और दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सपा जहां PDA के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित और सवर्ण समर्थन आधार को मजबूत बनाए रखने पर जोर देती रही है।इसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी में सामाजिक समीकरणों का मुद्दा लगातार प्रमुख होता जा रहा है।
दलित वोट पर बढ़ी राजनीतिक खींचतान
उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी दलित राजनीति की सबसे प्रमुख ताकत रही है। अब भाजपा और सपा दोनों ही दल इस वर्ग में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सपा की ओर से दलित नेताओं को संगठन में जगह देने और PDA को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। दूसरी तरफ भाजपा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और लाभार्थी वर्ग के जरिए विभिन्न सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच मजबूत करने का दावा करती है।
केशव मौर्य भाजपा के प्रमुख ओबीसी चेहरा
केशव प्रसाद मौर्य भाजपा के प्रमुख पिछड़े वर्ग के नेताओं में गिने जाते हैं। वह उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं। सपा के PDA अभियान के मुकाबले भाजपा की रणनीति में मौर्य जैसे ओबीसी नेताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। वह अक्सर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर परिवारवाद, कानून-व्यवस्था और पिछली सरकार के कामकाज जैसे मुद्दों को लेकर हमला करते रहे हैं।
चुनाव से पहले और तेज होगी जुबानी जंग
उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां आगे बढ़ने के साथ भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है। दोनों दल अपने-अपने सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने में जुटे हैं और पिछड़े तथा दलित मतदाताओं को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। ऐसे में केशव मौर्य की “लाल टोपी और नीला लिबास” वाली टिप्पणी केवल एक राजनीतिक तंज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूपी की बदलती सामाजिक और चुनावी रणनीति पर भाजपा के हमले का संकेत भी देती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि समाजवादी पार्टी इस बयान का क्या जवाब देती है।