लखनऊ - बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर युवाओं तथा सर्वसमाज की प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसी के साथ उन्होंने अपने परिवार को लेकर भी बड़ा फैसला स्पष्ट किया है। मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन इसका राजनीतिक लाभ उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को नहीं दिया जाएगा।
युवाओं को संगठन में प्राथमिकता
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि बीएसपी देशभर, खासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को संगठन में अधिक भागीदारी देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी संगठन में जेन-जी की करीब 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है।
उन्होंने यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ और युवा लोगों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने की बात भी कही। मायावती के मुताबिक, इसका उद्देश्य नई पीढ़ी के जरिए अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को आगे बढ़ाना है।
परिवारवाद को लेकर मायावती का स्पष्ट संदेश
मायावती ने कहा कि उन्होंने अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम तक सीमित रखा है और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक पदों का लाभ नहीं दिया। उन्होंने अपने इस रुख की तुलना बीएसपी संस्थापक कांशीराम की परिवारवाद विरोधी राजनीति से की। मायावती ने कहा कि वह पार्टी और आंदोलन के हितों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेंगी और व्यक्तिगत रिश्तों के कारण संगठन को नुकसान नहीं होने देंगी।
आनंद कुमार के बेटों को लेकर बड़ा ऐलान
बीएसपी प्रमुख ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उनकी देखभाल के साथ-साथ उनकी निगरानी में पार्टी की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। हालांकि, मायावती ने साफ किया कि आनंद कुमार की राजनीतिक जिम्मेदारियों का लाभ उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को नहीं मिलेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आनंद कुमार के दोनों बेटों को बीएसपी में किसी भी छोटे या बड़े राजनीतिक पद पर जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, भविष्य में उनके बेटों के बच्चों को भी यह राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपने की अनुमति नहीं होगी।
बेटी दीपिका आनंद के लिए खुला विकल्प
मायावती ने हालांकि आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद का अलग से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। भविष्य में जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार उनकी मदद ले सकते हैं।
मायावती के मुताबिक, यदि दीपिका की ईमानदारी, निष्ठा और कार्यक्षमता पार्टी की जिम्मेदारी के अनुरूप पाई जाती है, तो उन्हें आवश्यकता के अनुसार संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, यह फैसला उनकी योग्यता और पार्टी की जरूरत के आधार पर होगा।
बेटी भी तैयार नहीं तो कार्यकर्ता को मौका
मायावती ने यह भी कहा कि अगर भविष्य में दीपिका पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो आनंद कुमार पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनके भाई के बेटों और आगे उनके बच्चों को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। मायावती ने इसे पार्टी और आंदोलन के हित में जरूरी कदम बताया।
‘बहुजन समाज परिवार’ को बताया प्राथमिकता
मायावती ने कहा कि उनकी प्राथमिकता अपने रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देना नहीं, बल्कि पूरे ‘बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण और उसे अपने पैरों पर खड़ा करने का मिशन है। उन्होंने कहा कि कांशीराम जिस तरह परिवारवाद के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे, उसी तरह वह भी इस सिद्धांत पर कायम हैं। आगामी चुनावों में युवा, महिला और पुरुष—सभी वर्गों के योग्य लोगों को मौका देने पर जोर देते हुए मायावती ने संगठन में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया है।