लखनऊ- उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों, फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी में है। इसके तहत प्रदेश की हर ग्रामीण और शहरी संपत्ति को एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी दी जाएगी, जिससे संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड एक क्लिक में उपलब्ध होगा। सरकार का दावा है कि इससे विवादित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक प्रॉपर्टी आईडी
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश की सभी संपत्तियों को जीआईएस मैपिंग और स्वामित्व अभिलेखों से जोड़कर यूनिक प्रॉपर्टी आईडी जारी की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्य घरौनी योजना के माध्यम से किया जाएगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय और विकास प्राधिकरण इसकी जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे किसी भी संपत्ति का मालिकाना हक, स्थान और रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा तथा फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाले लेनदेन पर रोक लगेगी।
रजिस्ट्री होते ही अपने आप होगा नामांतरण
नई व्यवस्था में संपत्ति पंजीकरण के साथ ही नामांतरण प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। वर्तमान में लोगों को रजिस्ट्री के बाद अलग से नामांतरण कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया ऑनलाइन और स्वतः पूरी होगी। विभागों के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने के लिए एपीआई आधारित डेटा शेयरिंग और रियल टाइम अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा।
भू-आधार नंबर से जुड़ेगा हर भूमि रिकॉर्ड
केंद्र सरकार की योजना के अनुरूप प्रदेश की हर जमीन को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी 'भू-आधार' दिया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड आईडी भूमि अभिलेखों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ेगी। इससे जमीन का रिकॉर्ड अधिक सटीक, अपडेट और सुरक्षित रहेगा। किसी भी भूमि की स्थिति, स्वामित्व और सीमांकन संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
बिजली-पानी और टैक्स रिकॉर्ड होंगे एकीकृत
सरकार संपत्ति कर, बिजली, पानी और सीवर विभाग के रिकॉर्ड को भी कॉमन प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इससे सभी विभागों के बीच डेटा साझा करना आसान होगा और नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों में जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही कर संग्रहण और सेवा वितरण की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।
फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी पर होगी सख्ती
स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने पंजीकरण अधिनियम 1908 में नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इन प्रावधानों के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व की जांच अनिवार्य की जाएगी। इससे फर्जी दस्तावेजों, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने में भी मददगार साबित होगी।