उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। शिक्षक दंपतियों (पति-पत्नी) के तबादलों को लेकर लंबे समय से चल रहे भ्रम के बीच राज्य सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। अब साफ कर दिया गया है कि यदि पति या पत्नी में से केवल एक व्यक्ति ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया है, तो सिर्फ उसी के स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा। आवेदन न करने वाले जीवनसाथी का तबादला न तो स्वतः होगा और न ही उसे जबरन स्थानांतरित किया जाएगा। 22 जून 2026 को जारी इस स्पष्टीकरण के बाद उन हजारों शिक्षकों को राहत मिली है, जो पहले के आदेशों को लेकर असमंजस में थे। कई शिक्षक इस डर से अपने आवेदन वापस ले रहे थे कि कहीं दोनों का तबादला एक साथ न कर दिया जाए। अब शासन ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
क्यों पैदा हुआ था भ्रम?
इससे पहले जारी दिशा-निर्देशों के बाद शिक्षकों के बीच यह आशंका पैदा हो गई थी कि अगर पति या पत्नी में से किसी एक ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया, तो दोनों का एक साथ स्थानांतरण कर दिया जाएगा। इस आशंका के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन वापस लेने लगे थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन ने नया स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ कर दी है।
सरकार ने क्या कहा?
राज्य शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिस शिक्षक या शिक्षिका ने पोर्टल पर ट्रांसफर के लिए आवेदन किया है, केवल उसी के नाम पर विचार किया जाएगा। यदि पति या पत्नी में से किसी एक ने आवेदन नहीं किया है, तो उसका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। यानी किसी भी शिक्षक का तबादला उसकी सहमति या आवेदन के बिना नहीं होगा।
एक ही जिले या आसपास मिल सकती है तैनाती
शासन के अनुसार, आवेदन करने वाले शिक्षक को ऐसे जिले में तैनाती दी जा सकती है, जहां शिक्षक-छात्र अनुपात कम है और शिक्षकों की जरूरत अधिक है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पति-पत्नी को एक ही जिले या नजदीकी जिलों में कार्य करने का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि पारिवारिक जीवन और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके।
किन शिक्षकों को मिलेगी विशेष प्राथमिकता?
4 जून 2026 को जारी स्थानांतरण नीति के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में शिक्षकों के आवेदन पर प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा।
इन मामलों में मिलेगा विशेष लाभ
मुख्यमंत्री के अनुमोदन से भी हो सकेगा तबादला
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक विशेष या विषम परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तो मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद उसके स्थानांतरण पर विचार किया जा सकता है। इस प्रावधान का उद्देश्य ऐसे मामलों में राहत प्रदान करना है, जहां सामान्य नियमों के तहत समाधान संभव नहीं हो पाता।
शिक्षकों को मिली बड़ी राहत
नए स्पष्टीकरण के बाद शिक्षक संगठनों और कर्मचारियों में राहत की भावना देखी जा रही है। अब शिक्षक बिना किसी डर और भ्रम के अपनी जरूरत के अनुसार ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से पति-पत्नी दोनों की सहमति और सुविधा को प्राथमिकता मिलेगी, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनेगी।