हल्द्वानी : उत्तराखंड की मंडियों में सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हल्द्वानी मंडी में जगह-जगह गंदगी कूड़े के ढेर और दुर्गंध की शिकायतों के बीच लाखों रुपये के सफाई ठेके की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंडी में पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारी नहीं लगाए गए हैं जिसके कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
बताया जा रहा है कि उत्तराखंड की 26 मंडियों में सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था के लिए ठेका दिया गया है। आरोप है कि इस काम के लिए करीब 30 से 35 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि ठेके की वास्तविक राशि और शर्तों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से होना बाकी है।
सफाई व्यवस्था पर सवाल
हल्द्वानी मंडी कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख अनाज मंडियों में शामिल है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में किसान व्यापारी और अन्य लोग पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी परिसर में कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदगी जमा रहती है। इससे दुर्गंध की समस्या बनी रहती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आरोप है कि सफाई व्यवस्था के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर निरीक्षण के दौरान कम संख्या में कर्मचारी दिखाई देने की बात कही जा रही है, जबकि मंडी के बड़े क्षेत्र को देखते हुए अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता बताई जा रही है।
26 मंडियों पर सवाल
सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल केवल हल्द्वानी मंडी तक सीमित नहीं हैं। राज्य की अन्य मंडियों में भी सफाई व्यवस्था की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कई जगह नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदगी बढ़ रही है।
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब सफाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो मंडियों में पर्याप्त सफाई क्यों नहीं दिखाई दे रही है। यदि ठेके के तहत कर्मचारियों की संख्या और सफाई के मानक निर्धारित हैं तो उनका पालन हो रहा है या नहीं इसकी जांच की जरूरत बताई जा रही है।
मंडी परिषद ने जांच की बात कही
मंडी परिषद के अध्यक्ष के अनुसार सफाई का ठेका निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के तहत दिया गया है। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायत सामने आने पर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि ठेकेदार को भुगतान मंडी समिति की संतुष्टि और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
ऐसे में अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ठेकेदार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार सफाई कराई जा रही है या नहीं और कर्मचारियों की संख्या तथा काम की गुणवत्ता तय शर्तों के अनुरूप है या नहीं।
ठेकेदार और मंडी सचिव ने टिप्पणी से किया इनकार
मामले को लेकर ठेकेदार नन्हे कश्यप से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। वहीं मंडी सचिव की ओर से भी मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों की मांग है कि मंडी परिसर की सफाई व्यवस्था का निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाए और यदि कहीं भी लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद यह साफ हो सकेगा कि सफाई व्यवस्था में वास्तव में कितनी राशि खर्च हो रही है ठेके की शर्तों के अनुसार कितने कर्मचारी तैनात होने चाहिए और जमीनी स्तर पर उन मानकों का कितना पालन किया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि मंडी परिसर में गंदगी और सफाई संबंधी शिकायतों के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।