देहरादून- उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को जल्द बड़ा झटका लग सकता है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष 5,900 करोड़ रुपये की मांग रखी है। यदि आयोग इस मांग को मंजूरी देता है तो राज्य में बिजली दरों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे कारोबारियों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश से संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा है मामला
यह पूरा विवाद वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच बिजली संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा हुआ है। यूपीसीएल के अनुसार 12 अक्टूबर 2003 को उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के साथ ट्रांसफर स्कीम पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत 1,058.18 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां यूपीसीएल को हस्तांतरित की गई थीं।
केवल 508 करोड़ रुपये की संपत्ति को मिली मान्यता
यूपीसीएल का कहना है कि नियामक आयोग ने अब तक केवल 508 करोड़ रुपये की संपत्तियों को ही मान्यता दी है, जबकि शेष राशि को मान्यता नहीं मिलने के कारण कंपनी को पिछले 24 वर्षों में बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। कंपनी के अनुसार उसे न तो पूरी संपत्ति का डेप्रिसिएशन मिला और न ही इक्विटी पर उचित रिटर्न प्राप्त हुआ।
5900 करोड़ रुपये के दावे में क्या शामिल है?
यूपीसीएल ने आयोग के समक्ष कुल 5,900.01 करोड़ रुपये की मांग की है। इसमें 936.37 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) का दावा है, जबकि 4,963.65 करोड़ रुपये कैरिंग कॉस्ट के रूप में मांगे गए हैं। कंपनी का कहना है कि यदि यह राशि मिलती है तो उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान हो सकेगा।
सरकार के निर्देश पर दायर की गई याचिका
यूपीसीएल बोर्ड की 126वीं बैठक के बाद ऊर्जा विभाग ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत नियामक आयोग को आवश्यक निर्देश दिए। इसी के आधार पर कंपनी ने यह याचिका दायर की है। आयोग ने मामले में सभी हितधारकों से 27 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है सीधा असर
यूपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि यदि उसकी पूरी मांग स्वीकार होती है तो बिजली दरों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि करनी पड़ सकती है। इसका सबसे अधिक असर घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और किसानों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच बिजली की इतनी बड़ी दर वृद्धि आम लोगों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकती है।
अब आयोग के फैसले पर टिकी हैं निगाहें
अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को लेना है। यदि आयोग संतुलित समाधान निकालता है तो उपभोक्ताओं पर बोझ कम किया जा सकता है, लेकिन यदि यूपीसीएल की मांग पूरी तरह स्वीकार होती है तो राज्य में बिजली बिलों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।