कोलकाता: इस्कॉन कोलकाता द्वारा आयोजित 55वीं ऐतिहासिक कोलकाता रथयात्रा इस वर्ष 16 जुलाई 2026 को भव्य रूप से निकाली जाएगी। इस वर्ष की रथयात्रा का मुख्य विषय भारत- मंदिर संस्कृति की विरासत रखा गया है। आयोजकों के अनुसार, वर्तमान समय में विश्वभर में बढ़ते तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता के बीच यह रथयात्रा मानवता के लिए शांति, प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश लेकर आएगी। भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा की कृपा से यह आयोजन जाति, धर्म, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास करेगा।
विश्व शांति और मानव कल्याण का संदेश
इस्कॉन कोलकाता का कहना है कि यह रथयात्रा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति, सद्भाव और मानव कल्याण का आह्वान है। हरिनाम संकीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भक्ति संगीत और महाप्रसाद वितरण के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक परंपरा और मंदिर संस्कृति को विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी करेंगे शुभारंभ
इस वर्ष की रथयात्रा का प्रमुख आकर्षण पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उपस्थिति होगी। वे पारंपरिक छेरा पहाड़ा सेवा के तहत स्वर्ण झाड़ू से भगवान के रथ के मार्ग की सफाई करेंगे और इसके बाद रथ की पहली रस्सी खींचकर 55वीं कोलकाता रथयात्रा का विधिवत शुभारंभ करेंगे।
पिछले वर्ष रूस और यूक्रेन के श्रद्धालु बने थे एकता की मिसाल
आयोजकों ने बताया कि पिछले वर्ष रथयात्रा के दौरान रूस और यूक्रेन से आए श्रद्धालु एक साथ भगवान जगन्नाथ के रथ के सामने संकीर्तन और नृत्य करते दिखाई दिए थे। युद्धग्रस्त देशों के लोगों का यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि भगवान जगन्नाथ के समक्ष सभी भेदभाव समाप्त हो जाते हैं और पूरी दुनिया एक परिवार बन जाती है।
आधुनिक तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम
इस्कॉन कोलकाता की रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता पारंपरिक निर्माण शैली और आधुनिक अभियांत्रिकी का संगम है। भगवान जगन्नाथ के 38 फीट ऊंचे रथ में मोड़ने योग्य छत्र लगाया गया है, जिससे संकरी सड़कों पर भी रथ आसानी से गुजर सके। पिछले वर्ष इस रथ में 1977 से लगे बोइंग 747 विमान के पहियों की जगह सुखोई-30 लड़ाकू विमान के पहिए लगाए गए थे, जो इस वर्ष भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। भगवान बलराम के रथ की ऊंचाई 36 फीट है, जबकि देवी सुभद्रा का रथ तीनों में सबसे छोटा होगा।

16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा
रथयात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे इस्कॉन कोलकाता मंदिर, 3जी अल्बर्ट रोड से होगा। यात्रा सरत बोस रोड, एक्साइड चौराहा, हंगरफोर्ड स्ट्रीट, ए.जे.सी. बोस रोड, हाजरा रोड, श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड, जवाहरलाल नेहरू रोड, आउटराम रोड होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचेगी।
24 जुलाई को निकलेगी उल्टा रथयात्रा
बहुदा यात्रा (उल्टा रथ) 24 जुलाई को दोपहर 12 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड से प्रारंभ होगी। यात्रा आउटराम रोड, जवाहरलाल नेहरू रोड, मौलाली, फिलिप्स क्रॉसिंग, आनंद एस्प्लेनेड, ए.जे.सी. बोस रोड, पार्क सर्कस, सैयद अमीर अली एवेन्यू और हंगरफोर्ड स्ट्रीट होते हुए इस्कॉन मंदिर पहुंचेगी।
17 से 23 जुलाई तक लगेगा जगन्नाथ महामेला
रथयात्रा के अगले दिन 17 जुलाई से 23 जुलाई तक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य श्री जगन्नाथ महामेला आयोजित किया जाएगा। यहां तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित गुंडिचा मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी। सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ, भगवान बलराम और देवी सुभद्रा यहां विराजमान रहेंगे और श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और महाप्रसाद का आयोजन
महामेले में प्रतिदिन शाम 3:30 बजे से 8:30 बजे तक सभी श्रद्धालुओं को खिचड़ी महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। देशभर के प्रसिद्ध नृत्य दल, डोना गांगुली की नृत्य मंडली, पद्मश्री सम्मानित कलाकारों की प्रस्तुतियां, भक्ति नाट्य मंचन, हरिनाम संकीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन भी आयोजित किए जाएंगे।
150 से अधिक देशों में मनाई जाती है रथयात्रा
इस्कॉन के संस्थापक आचार्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के प्रयासों से आज रथयात्रा विश्व के 150 से अधिक देशों और चार हजार से अधिक स्थानों पर आयोजित की जाती है। 9 जुलाई 1967 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में पहली अंतरराष्ट्रीय रथयात्रा निकाली गई थी। कोलकाता की रथयात्रा पुरी के बाद देश की सबसे बड़ी रथयात्रा मानी जाती है, जिसमें हर वर्ष लगभग 20 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं।
रथयात्रा का आध्यात्मिक संदेश
आयोजकों ने सभी नागरिकों से परिवार सहित रथयात्रा में शामिल होने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि आज की अशांत दुनिया में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा प्रेम, करुणा, शांति, भाईचारे और मानव कल्याण का संदेश लेकर आती है। शास्त्रों में कहा गया है कि रथे च वामनं दृष्ट्वा पुनर्जन्म न विद्यते, अर्थात जो श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ पर विराजमान स्वरूप का दर्शन करता है, वह जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति की दिशा में अग्रसर होता है।