कोलकाता: दक्षिण 24 परगना के बारूईपुर में 11 वर्षीय नाबालिग से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले को लेकर बुधवार को कोलकाता का हाजरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। बारूईपुर कांड के विरोध में कालीघाट टीएमसी (Kalighat TMC) की ओर से निकाली गई विरोध रैली के दौरान अचानक तनाव फैल गया। रैली के गुजरते समय प्रदर्शनकारियों के सामने 'चोर-चोर' के नारे लगाए गए और 'माछ चोर' (मछली चोर) का गाना बजाया गया, जिससे भड़के टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई।
हाईकोर्ट की अनुमति के बाद शुरू हुई थी रैली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बारूईपुर की घटना के विरोध में रैली निकालने के लिए कालीघाट टीएमसी ने मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) का रुख किया था। अदालत ने कुछ शर्तों के साथ रैली की अनुमति दी थी। तय कार्यक्रम के मुताबिक, बुधवार को बालीगंज फाड़ी से यह विरोध मार्च शुरू हुआ था।
'चोर' के नारे और 'माछ चोर' गाने पर भड़का गुस्सा
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रैली जैसे ही हाजरा के करीब पहुंची, अचानक सड़क के एक किनारे से रैली को निशाना बनाते हुए 'चोर-चोर' के नारे गूंजने लगे। इतना ही नहीं, सड़क के एक तरफ लाउडस्पीकर पर 'माछ चोर' (मछली चोर) गाना भी बजाया जाने लगा।
बीजेपी पर आरोप: कालीघाट टीएमसी ने आरोप लगाया कि इस उकसावे के पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ है और वे जानबूझकर शांतिपूर्ण रैली में बाधा डालने की कोशिश कर रहे थे।
कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट: इस नारेबाजी के बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: हाजरा मोड़ पर भारी तनाव की खबर मिलते ही कोलकाता पुलिस की एक विशाल वाहिनी (बड़ी टीम) तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और कड़े हाथों से स्थिति को नियंत्रित किया।
जब प्रशासन है मुस्तैद, तो रैली क्यों? उठ रहे सवाल
दिलचस्प बात यह है कि यह बवाल उसी दिन हुआ, जब मंगलवार देर रात बारूईपुर कांड का मुख्य आरोपी प्रभास मंडल पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में मारा गया। पुलिस का दावा है कि सूर्यपुर में सीन रीक्रिएशन के दौरान उसने भागने की कोशिश की थी, जिसके बाद जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई। इसके अलावा मामले के चौथे आरोपी कबीर मोल्ला को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस आरोपियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर रही है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल भी उठने लगा है कि जब घटना के पहले दिन से ही राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं और आरोपी एनकाउंटर में मारा जा चुका है, तो फिर सत्तारूढ़ दल के एक धड़े (कालीघाट टीएमसी) द्वारा इस तरह की सड़क पर रैली निकालने का क्या औचित्य था? फिलहाल पूरे हाजरा और आसपास के इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।