कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित हाई-लेवल समीक्षा बैठक में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव पर्यवेक्षक अनुराग यादव के बीच तीखी बहस हो गई।
'आप ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते'- पर्यवेक्षक की आपत्ति
वर्चुअल बैठक के दौरान अनुराग यादव ने CEC की टिप्पणी पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि उनके साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
CEC ने जताई नाराज़गी, बैठक में छाया सन्नाटा
स्थिति तब और बिगड़ गई जब CEC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें बैठक से बाहर जाने तक की बात कह दी। इस तीखी नोकझोंक के बाद कुछ देर के लिए बैठक में सन्नाटा छा गया।
पद से हटाने का फैसला, आयोग ने बताई वजह
घटना के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने अनुराग यादव को सामान्य पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई उनके व्यवहार के कारण नहीं बल्कि “पेशेवर अक्षमता” के आधार पर की गई।
बुनियादी सवालों के जवाब न दे पाने पर उठे सवाल
बताया गया कि बैठक के दौरान उनसे उनके क्षेत्र के मतदान केंद्रों से जुड़े अहम सवाल पूछे गए थे, जिनका वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसी को लेकर CEC ने उनकी आलोचना की।
'आंख और कान' होते हैं पर्यवेक्षक- आयोग
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पर्यवेक्षक आयोग की “आंख और कान” होते हैं। ज़मीनी जानकारी में कमी पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती है।
संवेदनशील बूथों पर सख्ती की तैयारी
बैठक में कूच बिहार समेत संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने पर भी चर्चा की गई।