कोलकाता : निकाय चुनाव को लेकर नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गठबंधन की अटकलों पर विराम लग गया है। NCPI सांसद सुदीप बनर्जी के दावे को पहले पश्चिम बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुकांत मजूमदार और अब दिलीप घोष ने भी सिरे से खारिज कर दिया है। दिलीप घोष ने स्पष्ट कहा कि उन्हें ऐसे किसी गठबंधन की जानकारी नहीं है और पार्टी का नेतृत्व ही निर्णय लेगा।
NCPI के दावे पर क्या बोले दिलीप घोष
सुदीप बनर्जी द्वारा दो शहरों के निकाय चुनाव में एनडीए के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ने के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कहा, "मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। NCPI कहां है? वे तो दिल्ली में हैं, यहां बंगाल में कहां हैं? और बीजेपी किसे साथ लेगी और किसे नहीं, यह फैसला हमारी शीर्ष नेतृत्व टीम करेगी।"
सुकांत मजूमदार का रुख भी रहा स्पष्ट
इससे पहले, कोलकाता निकाय चुनाव की कमान संभाल रहे केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी सुदीप बनर्जी के दावों को खारिज कर दिया था। सुकांत मजूमदार ने कहा, "हमारे प्रदेश अध्यक्ष पहले ही साफ कर चुके हैं कि बंगाल में बीजेपी का कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है। विधानसभा चुनाव भी हमने बिना किसी शरिक के अकेले लड़ा और कई सीटें जीतीं। इसलिए केएमसी (KMC) चुनाव में किसी सहयोगी दल को साथ लेने का कोई प्रस्ताव मेरे पास नहीं आया है और न ही इस पर कोई चर्चा हुई है।"
जादवपुर में 'वंदे मातरम' और रक्षाबंधन पर तीखी प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में राखी बंधन उत्सव के दौरान 10 हजार कंठों से 'वंदे मातरम' गाए जाने के आयोजन पर दिलीप घोष ने कहा, "राखी हमारी संस्कृति और सामाजिक सूत्र है। रवींद्रनाथ टैगोर ने बंग-भंग आंदोलन रोकने के लिए वंदे मातरम और राखी के जरिए समाज को एकजुट किया था।" उन्होंने आगे कहा कि जादवपुर में कुछ लोग अलगाववादी मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं, इसलिए वहां राष्ट्रवाद की सख्त जरूरत है।
"राष्ट्रवाद का केंद्र बनेगा पश्चिम बंगाल"
जादवपुर में वंदे मातरम को लेकर लगे पोस्टरों पर प्रदेश के मंत्री (दिलीप घोष) ने तंज कसते हुए कहा, "यह अच्छी बात है कि जिन्होंने कभी वंदे मातरम नहीं गाया, वे अब इसे गाने लगे हैं। इससे 'दिमागी नक्सलियों' को परेशानी हो रही है और यही असली बदलाव है।" उन्होंने भरोसा जताया कि पश्चिम बंगाल एक बार फिर राष्ट्रवाद के आंदोलन का नेतृत्व करेगा और विदेशी विचारों के जरिए भारतीय राष्ट्रवाद को कमजोर करने की कोशिशों को नाकाम करेगा।