कोलकाता: आधुनिक भारत के प्रखर राष्ट्रवादी नेता, शिक्षाविद और जननेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन, विचार और राष्ट्रनिर्माण में योगदान पर आधारित पुस्तक 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी: नए इतिहास की खोज में' का लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व, राष्ट्रवाद और अखंड भारत के विचार से परिचित कराना है।
पूरे राज्य में आयोजित हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम
जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सबसे पहले कोलकाता के रेड रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे मुरलीधर सेन लेन और भवानीपुर स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन पहुंचे, जहां डॉ. मुखर्जी ने 1906 से 1917 तक शिक्षा प्राप्त की थी।
पाठ्यक्रम में शामिल होंगे डॉ. मुखर्जी के विचार
मित्रा इंस्टीट्यूशन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, राष्ट्रवाद, पश्चिम बंगाल के गठन में उनकी भूमिका, अखंड भारत की अवधारणा और शिक्षा व उद्योग के क्षेत्र में उनके योगदान को स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचारों और योगदान का अध्ययन नई पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए, ताकि विद्यार्थी भारत के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को बेहतर ढंग से समझ सकें।
मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास के लिए बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री ने मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास और संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने अपने विधायक निधि से 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही विद्यालय के ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए उसके पुनरुद्धार का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय को पीएम श्री योजना के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।
राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा जीवन
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद परिवार में हुआ था। व्यक्तिगत जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने स्वयं को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया। स्वतंत्र भारत में उन्होंने उद्योग मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और राष्ट्रीय एकता, शिक्षा तथा विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
नई पुस्तक से नई पीढ़ी को जोड़ने का प्रयास
जयंती के अवसर पर जारी पुस्तक 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी: नए इतिहास की खोज में' को डॉ. मुखर्जी के विचारों, राष्ट्रवाद और सार्वजनिक जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पुस्तक के माध्यम से उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं और राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।