नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (IPACPL) के फाउंडिंग डायरेक्टर विनेश कुमार चंदेल को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर की गई है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जी लेन-देन और खातों में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इस गिरफ्तारी को आगामी चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिससे मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
ED की जांच के अनुसार, IPACPL पर आरोप है कि उसने राजनीतिक दलों से जुड़े फंडिंग सिस्टम में गड़बड़ी कर बड़े पैमाने पर ‘अघोषित धन’ (unaccounted money) का इस्तेमाल किया। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी ने फर्जी कंपनियों, शेल एंटिटीज और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के जरिए काले धन को सफेद करने का नेटवर्क तैयार किया था।
यह मामला तब सामने आया जब EOW ने वित्तीय अनियमितताओं को लेकर FIR दर्ज की, जिसके बाद ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच शुरू की।
ED के बड़े आरोप:
- फर्जी लोन और शेल कंपनियां:
जांच में खुलासा हुआ है that 2019-20 और 2020-21 के दौरान 'रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड' से करीब 13.50 करोड़ रुपये का बिना ब्याज वाला असुरक्षित लोन दिखाया गया। ED का कहना है कि यह लोन केवल कागजों पर था और इसका मकसद अवैध धन को वैध दिखाना था।
- दोहरा पेमेंट सिस्टम :
एजेंसी के मुताबिक, कंपनी राजनीतिक दलों से मिलने वाले भुगतान को दो हिस्सों में बांटती थी—एक हिस्सा बैंकिंग चैनल के जरिए लिया जाता था, जबकि दूसरा हिस्सा नकद (cash) में लिया जाता था, जिसे आधिकारिक खातों में नहीं दिखाया जाता था।
- हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल:
जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए हवाला चैनलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इससे पैसों की वास्तविक ट्रेल को छुपाने की कोशिश की गई।
- फर्जी बिलिंग और इनवॉइस:
ED ने यह भी आरोप लगाया है कि बिना किसी वास्तविक सेवा के फर्जी बिल बनाए गए, ताकि पैसों के स्रोत को वैध दिखाया जा सके।
- सबूत मिटाने की कोशिश:
छापेमारी के बाद विनेश चंदेल और अन्य अधिकारियों द्वारा महत्वपूर्ण ईमेल, डिजिटल डेटा और वित्तीय दस्तावेज डिलीट करने के निर्देश दिए गए। ED का कहना है कि यह जांच को प्रभावित करने और सबूत मिटाने की साजिश का हिस्सा था।
बचाव पक्ष की दलील
विनेश चंदेल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत में ED के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि:
- यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है और आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर की गई है।
- जिन मामलों का जिक्र किया जा रहा है, वे आयकर या GST से जुड़े हैं और उन्हें PMLA के तहत नहीं लाया जा सकता।
- आरोपी पहले से ही जांच में सहयोग कर रहे थे, ऐसे में अचानक गिरफ्तारी अनुचित और गैरकानूनी है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ED के पास अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का सीधा संबंध साबित हो सके।
कोर्ट का आदेश:
- पटियाला हाउस कोर्ट ने ED की दलीलों को सुनने के बाद विनेश चंदेल को 10 दिनों की कस्टडी में भेज दिया है।
- यह कस्टडी 14 अप्रैल 2026 सुबह 3:30 बजे से 23 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगा
- आरोपी को 23.04.2026 को संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया है
कोर्ट ने ED को सख्त निर्देश भी दिए हैं:
- पूछताछ केवल CCTV कैमरों से लैस स्थान पर की जाए
- CCTV फुटेज को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश (परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह केस) के अनुसार सुरक्षित रखा जाए
- हिरासत के दौरान आरोपी की हर 48 घंटे में मेडिकल जांच कराई जाए
अदालत ने इन शर्तों के साथ ED की कस्टडी याचिका स्वीकार कर ली और आवेदन का निपटारा कर दिया।
यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर अहम हो गया है। ED की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे और बड़े नाम और वित्तीय कनेक्शन सामने आ सकते हैं। खासतौर पर चुनावी फंडिंग और हवाला नेटवर्क को लेकर एजेंसी की नजरें कई अन्य संदिग्ध लेन-देन पर भी टिकी हुई हैं।
आने वाले दिनों में कोर्ट की अगली सुनवाई और ED की पूछताछ इस केस की दिशा तय करेगी।