कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। इस घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को कोलकाता के सीआईटी रोड स्थित पद्मपुकुर पहुंचीं। उन्होंने घटनास्थल का दौरा कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली, स्थानीय स्थिति का जायजा लिया और वहां मौजूद पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा स्थानीय लोगों से बातचीत की। उनके दौरे के दौरान इलाके में बड़ी संख्या में तृणमूल समर्थक भी मौजूद रहे।
घटनास्थल पर लिया हालात का जायजा
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद्मपुकुर पहुंचकर गिरफ्तारी के बाद बने हालात की समीक्षा की। उन्होंने मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं से विस्तार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बने माहौल की जानकारी प्राप्त की। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ आगे की रणनीति और संगठनात्मक कदमों पर भी चर्चा की।
कुणाल घोष की गिरफ्तारी से गरमाई सियासत
कुणाल घोष की गिरफ्तारी के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बता रही है और आरोप लगा रही है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
पार्टी नेताओं के साथ की चर्चा
पद्मपुकुर में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौजूद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने संगठन के नेताओं से बातचीत करते हुए कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और पूरे मामले पर संयम बरतने की सलाह दी। उनके दौरे के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही और पुलिस बल तैनात रहा।
आगे की गतिविधियों पर सबकी नजर
कुणाल घोष की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार बैठकें कर रही है और मामले के राजनीतिक तथा कानूनी पहलुओं पर मंथन जारी है। वहीं प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पद्मपुकुर पहुंचना इस मामले को लेकर पार्टी की सक्रियता और गंभीरता का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना जताई जा रही है।