कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद बुधवार, 28 अक्टूबर को दोनों नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। नंदीग्राम से हासिरानी रथ और रेजीनगर से शाखारव सरकार ने विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उपचुनाव में जीत दर्ज की थी।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिलाई शपथ
कोलकाता स्थित पश्चिम बंगाल विधानसभा में आयोजित समारोह में विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने दोनों विधायकों को शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। दोनों विधायकों के शपथ लेने के साथ ही उपचुनाव के बाद विधानसभा में उनकी सदस्यता की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई।
नंदीग्राम में हासिरानी रथ ने बड़े अंतर से दर्ज की जीत
नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने के लिए नंदीग्राम विधानसभा सीट छोड़ दी थी। इसके बाद यहां उपचुनाव कराया गया, जिसमें भाजपा उम्मीदवार हासिरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 1,22,753 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया। हासिरानी रथ, सुवेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं।
रेजीनगर में भी भाजपा का परचम
मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार शाखारव सरकार ने जीत हासिल की। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को बड़े अंतर से पराजित किया। चुनाव में सरकार को 75,816 वोटों के अंतर से जीत मिली। इस सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की बड़ी आबादी होने के कारण भाजपा की जीत को राजनीतिक रूप से अहम माना गया।
छह अक्टूबर को हुआ था मतदान
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए गए। नंदीग्राम सीट सुवेंदु अधिकारी और रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण खाली हुई थी। दोनों नेताओं ने विधानसभा चुनाव में दो-दो सीटों पर जीत हासिल करने के बाद एक-एक सीट छोड़ दी थी।
विधानसभा में भाजपा की स्थिति मजबूत
दोनों सीटों पर जीत के बाद 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा की संख्या बढ़कर 209 हो गई। नंदीग्राम और रेजीनगर के नतीजों को राज्य में भाजपा की राजनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब दोनों विधायकों के शपथ ग्रहण के बाद उनका विधानसभा में औपचारिक रूप से कामकाज शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।