अंतरराष्ट्रीय समाचार | पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को मिसाइल से निशाना बनाने का दावा किया है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी और बाजार में कीमतों को समर्थन मिला। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने की बात भी सामने आई है।
ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर के पार
दिए गए बाजार आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड के दिसंबर वायदा अनुबंध में 1.55 डॉलर यानी 1.36 प्रतिशत की तेजी आई और कीमत 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.43 प्रतिशत बढ़कर 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता को प्रमुख वजह माना जा रहा है। क्षेत्र में किसी भी बड़े घटनाक्रम से कच्चे तेल की आपूर्ति और परिवहन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
हूती विद्रोहियों का दावा, सऊदी अरब की पुष्टि नहीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती समूह ने सऊदी अरब की करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार सऊदी अधिकारियों ने हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद बाजार में संभावित आपूर्ति व्यवधान की आशंका बढ़ गई। तेल बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम का असर तेजी से दिखाई देता है, क्योंकि उत्पादक क्षेत्रों या अहम परिवहन मार्गों में तनाव बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
एक दिन पहले गिर गए थे तेल के दाम
कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया, जब एक दिन पहले कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट दर्ज की गई थी। उस समय मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीदों से बाजार को राहत मिली थी। इसके अलावा, अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में संभावित बढ़ोतरी की खबरों ने भी कीमतों पर दबाव बनाया था। लेकिन नए हमले के दावे से बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता फिर बढ़ गई।
क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने के मुद्दे पर बैठक हुई। बताया गया कि सभी पक्षों ने शांति और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यही अनिश्चितता अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव की एक प्रमुख वजह बन रही है।
ओपेक+ की बैठक पर भी बाजार की नजर
तेल बाजार की नजर ओपेक+ की आगामी बैठक पर भी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रविवार को होने वाली बैठक में दिसंबर के उत्पादन लक्ष्यों में बदलाव नहीं किए जाने की संभावना है। सऊदी अरब, रूस और इराक सहित कुछ प्रमुख उत्पादक देशों का उत्पादन निर्धारित लक्ष्यों से नीचे रहने की बात भी रिपोर्टों में कही गई है। ओपेक+ के फैसले वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में बाजार यह देखेगा कि संगठन उत्पादन नीति में कोई बदलाव करता है या मौजूदा रुख बनाए रखता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव से बढ़ी चिंता
सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है। इसलिए वहां तेल उत्पादन या आपूर्ति से जुड़ी किसी भी आशंका का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता भी बनी हुई है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम समुद्री मार्ग है। संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से गुजरता था। यदि यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ सकता है।