तिरुवनंतपुरम: सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों शिक्षक अभ्यर्थियों का इंतजार अब आंदोलन में बदल गया है। केरल में लोअर प्राइमरी स्कूल टीचर (LPST) परीक्षा पास करने और लोक सेवा आयोग (PSC) की रैंक लिस्ट में जगह बनाने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज अभ्यर्थी राज्य सचिवालय के बाहर पिछले 115 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबे इंतजार और कथित तौर पर बार-बार मिले आश्वासनों से निराश अभ्यर्थियों ने अब अपना आंदोलन और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में रैंक-होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने सिर मुंडवाकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
आंसुओं के बीच मुंडन, नियुक्ति के लिए आर-पार की लड़ाई
एलपीएसटी रैंक-होल्डर्स एसोसिएशन की सचिव एस. वलारमथी ने नियुक्तियों की मांग को लेकर प्रतीकात्मक विरोध के रूप में अपना सिर मुंडवा लिया। आंखों में आंसू और चेहरे पर नाराजगी के साथ उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें ठोस नतीजा नहीं मिला है।
बारिश में भी जारी है प्रदर्शन, शेड लगाने की अनुमति नहीं मिलने का आरोप
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि पुलिस प्रशासन उन्हें धरना स्थल पर धूप और बारिश से बचने के लिए टेंट या शेड लगाने की अनुमति नहीं दे रहा है। इसके चलते उन्हें खराब मौसम में भी खुले आसमान के नीचे बैठकर विरोध करना पड़ रहा है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, लगातार जारी प्रदर्शन और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
मौखिक आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहते हैं अभ्यर्थी
आंदोलन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि अब वे केवल बातचीत और मौखिक आश्वासनों के आधार पर अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि सरकार नियुक्तियों से जुड़े फैसलों पर लिखित आदेश जारी करे और उसे धरना स्थल तक पहुंचाया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक मांगों पर अमल की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आती, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र-शिक्षक अनुपात में बदलाव समेत चार प्रमुख मांगें
शिक्षक अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि इन पर फैसला होने से न केवल योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर मिलेगा, बल्कि स्कूलों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकेगी।
पहली मांग: छात्र-शिक्षक अनुपात को मौजूदा 1:30 से घटाकर 1:25 किया जाए। अभ्यर्थियों का मानना है कि इससे शिक्षकों की जरूरत और नियुक्तियों के अवसर बढ़ सकते हैं।
दूसरी मांग: एडेड स्कूलों में सीधी नियुक्तियों पर रोक लगाई जाए और रिक्त पदों को केरल लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से भरा जाए।
तीसरी मांग: मौजूदा पीएससी रैंक लिस्ट की वैधता अवधि बढ़ाई जाए, ताकि सूची में शामिल योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सके। साथ ही खाली पदों पर जल्द नियुक्तियां की जाएं।
चौथी मांग: जिन जिलों में दो शैक्षणिक सत्र बीतने के बावजूद एक भी नियुक्ति नहीं हुई है, वहां रिक्त पदों को तत्काल भरने के लिए कदम उठाए जाएं।
30 सितंबर के आश्वासन पर अमल नहीं होने का आरोप
अभ्यर्थियों के मुताबिक, 30 सितंबर को शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में उन्हें आश्वासन दिया गया था कि यदि वे प्रदर्शन वापस ले लेते हैं, तो उनकी मांगों से संबंधित लिखित आदेश जारी कर दिया जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बाद में सरकार ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए अपने रुख में बदलाव कर लिया। इसी घटनाक्रम ने अभ्यर्थियों की नाराजगी और बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की कोशिशें भी नाकाम रहने का दावा
आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए कई बार मुलाकात का समय मांगा, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष में रहते हुए नेताओं ने नियुक्तियों को लेकर जो भरोसा दिलाया था, सत्ता में आने के बाद उन वादों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
नियुक्ति मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
केरल के इन शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा पास करने और रैंक लिस्ट में जगह बनाने के बाद भी नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना उनके भविष्य पर सवाल खड़े करता है। अब उन्होंने सरकार से स्पष्ट फैसला लेने की मांग की है। आमरण अनशन शुरू होने के बाद आंदोलन ने गंभीर रूप ले लिया है। अभ्यर्थियों ने दो टूक कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।