लखनऊ | उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार निवेश के नए अवसर तलाश रही है। इसी क्रम में सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, मौजूदा परियोजनाओं को गति देने और निवेश को धरातल पर उतारकर उत्पादन शुरू कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार का लक्ष्य निवेश के माध्यम से नए उद्योग स्थापित करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

2017 के बाद निवेश की रणनीति में बदलाव का दावा
सरकार की ओर से कहा गया है कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए स्पष्ट दृष्टि और ठोस कार्ययोजना का अभाव था। इसके बाद डबल इंजन सरकार ने निवेश और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नई कार्य-संस्कृति विकसित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र को निवेश और औद्योगिक विकास की रणनीति का आधार बताया गया है।
कानून-व्यवस्था और निवेश अनुकूल माहौल पर जोर
राज्य सरकार के अनुसार, बेहतर कानून-व्यवस्था, पारदर्शी नीतियों और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण उत्तर प्रदेश में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। सरकार प्रदेश को निवेश, नवाचार और उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रस्तावित चर्चा में निवेश की नई संभावनाओं के साथ मौजूदा परियोजनाओं की प्रगति और उन्हें समय पर लागू करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
निवेश को उत्पादन और रोजगार से जोड़ने की तैयारी
सरकार का जोर केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर औद्योगिक उत्पादन शुरू कराने पर भी है। इसके तहत परियोजनाओं की प्रगति तेज करने और निवेश को रोजगार के अवसरों में बदलने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि नए उद्योगों से रोजगार बढ़ेगा और इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया गया है।