कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले जनसंख्या (डेमोग्राफी) का मुद्दा अब सियासत के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार के हालिया बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। उन्होंने दावा किया है कि तेजी से बदलती जनसंख्या आने वाले समय में चुनावी गणित को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है।
मजूमदार का कहना है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहता है, तो कई जिलों में जनसंख्या संतुलन बदल सकता है, जिससे चुनावी समीकरण पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने 2026 के चुनाव को “टर्निंग पॉइंट” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राज्य की दिशा और भविष्य तय करने वाला चुनाव होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में जनसंख्या संतुलन तेजी से बदला है। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण में डेमोग्राफिक फैक्टर को प्राथमिकता देनी पड़ सकती है।
रणनीति में बदलाव पर BJP का फोकस
2021 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। पार्टी बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देने पर जोर दे रही है। इसके साथ ही BJP “बंगाल-केंद्रित” नैरेटिव तैयार कर मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश में है।
मतदाता सूची पर भी उठे सवाल
मजूमदार ने मतदाता सूची (Electoral Roll) को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इसमें सुधार की जरूरत है और अगर कथित तौर पर गलत या डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं, तो कई सीटों के नतीजे बदल सकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2021 के चुनाव में कई सीटों पर बहुत कम अंतर से जीत-हार तय हुई थी।
सीमावर्ती इलाकों पर चिंता
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ रहा है, जो भविष्य में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उनके मुताबिक, यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राज्य की पहचान से जुड़ा मुद्दा भी है।
TMC का पलटवार
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि BJP जानबूझकर जनसंख्या और मतदाता सूची के मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है। TMC ने उल्टा BJP पर ही वैध मतदाताओं के नाम हटाने और सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। यह विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है, जिससे सियासी टकराव और तेज हो गया है।
2021 के नतीजे और 2026 की तैयारी
गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP को करीब 38.15 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी। वहीं TMC ने भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। अब 2026 के चुनाव को लेकर दोनों दल पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल का आगामी चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं रह गया है। यह डेमोग्राफी, पहचान, विकास और चुनावी रणनीति जैसे बड़े मुद्दों का संगम बनता जा रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि इन मुद्दों का असर मतदाताओं के फैसले पर कितना पड़ता है।