सूरत/अहमदाबाद: गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर पिछले 24 घंटों में दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने प्रशासन और राजनीति के दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर हजारों प्रवासी मजदूर अपने घर जाने के लिए पुलिस की लाठियां खाने को मजबूर हुए, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों के लिए 'स्पेशल ट्रीटमेंट' वाली ट्रेन रवाना की गई।
मजदूरों की बेबसी: उधना स्टेशन पर भगदड़ और लाठीचार्ज
रविवार दोपहर को उधना स्टेशन पर तब अराजकता फैल गई जब बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जाने वाले करीब 23,000 प्रवासी मजदूर स्टेशन पहुंच गए। गर्मियों की छुट्टियां और हीरा-कपड़ा उद्योगों में मंदी (ईरान युद्ध संकट के कारण) के चलते मजदूर अपने गांव लौट रहे थे। पुलिस की सख्ती: भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम रही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी ने मजदूरों पर लाठियां भांजी। लोग जान बचाने के लिए रेलिंग फांदते और भागते नजर आए। हीरा और टेक्सटाइल सेक्टर में काम बंद होने और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के बीच ये मजदूर अपने घर लौटने को बेताब थे।
बीजेपी समर्थकों के लिए 'शान-ए-सफर'
मजदूरों के साथ हुए इस हंगामे के कुछ ही घंटों बाद उसी स्टेशन से एक बिल्कुल अलग नजारा दिखा। करीब 1,300 यात्री एक विशेष एसी ट्रेन (Special AC Train) से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुए।
लक्ष्य 'परिवर्तन': ये यात्री सूरत में काम करने वाले बंगाली प्रवासी हैं, जिन्हें बीजेपी का कट्टर समर्थक बताया जा रहा है। ये लोग ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ 'परिवर्तन' के लिए वोट डालने बंगाल जा रहे हैं।
पार्टी की रणनीति: भाजपा की योजना सूरत से ऐसे 5,000 प्रवासियों को बंगाल भेजने की है। यात्रियों ने 'जय श्री राम' और 'वंदे मातरम' के नारों के साथ सफर शुरू किया। इन यात्रियों के सफर का खर्च सूरत के विभिन्न बंगाली संघों द्वारा वहन किया जा रहा है।
विपक्ष का प्रहार
कांग्रेस नेता और गुजरात संघर्ष मजदूर संघ के महासचिव शरद जांगड़े ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा: "सरकार आम मजदूरों की भीड़ संभालने में विफल रही और उन पर लाठियां चलवाईं, लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी समर्थकों को बंगाल ले जाने के लिए विशेष ट्रेन की सुविधा तुरंत मुहैया करा दी गई। यह प्रशासन का दोहरा चेहरा है।"
रेलवे का पक्ष
पश्चिमी रेलवे के महाप्रबंधक रामाश्रय पांडे ने बताया कि स्टेशन पर यह अफवाह फैल गई थी कि सुबह 11:30 बजे के बाद कोई ट्रेन नहीं चलेगी, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवाएं जारी हैं और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले, सूरत की यह 'चुनावी एक्सप्रेस' अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।