कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में गृह एवं पर्वतीय मामलों के बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। बुधवार को अपने जवाबदेही भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने आरजी कर (RG Kar) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की दुखद घटना का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए।
"पूर्व सीएम ने एक साल तक दबाकर रखी आरजी कर की फाइल"
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पास आरजी कर घटना से जुड़े ऐसे दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं, जिनसे साफ होता है कि मामले को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला गया था।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा:"आरजी कर अस्पताल में हुई बर्बरता से जुड़ी मुख्य फाइल को तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लगभग एक साल तक दबाकर रखा था। इस मामले की महत्वपूर्ण फाइलों और रिपोर्टों को दबाया गया ताकि सच सामने न आ सके।"
निर्भया मामले का दिया उदाहरण, पिछली सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया कांड का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कर चारों दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया था।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब दिल्ली में त्वरित न्याय संभव था, तो फिर पश्चिम बंगाल में पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के दौरान महिला उत्पीड़न के गंभीर मामलों में कठोर कदम क्यों नहीं उठाए गए? उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले किसी भी अपराध को हल्के में नहीं लेगी और कानून की सीमाओं के भीतर रहकर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस को खुली छूट: "किसी के आदेश का इंतजार न करें"
विधानसभा के पटल से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य पुलिस प्रशासन को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों को निर्देशित करते हुए कहा:"अगर किसी भी महिला या बच्चे पर अत्याचार या उत्पीड़न का मामला सामने आता है, तो पुलिस को किसी के भी आदेश या अनुमति का इंतजार करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। सुरक्षा और गरिमा की रक्षा के लिए जो भी कानूनी और सख्त कदम जरूरी महसूस हों, उन्हें उठाने की हिम्मत दिखाएं। पूरी सरकार पुलिस के साथ मजबूती से खड़ी है।"गृह विभाग के बजट पर बोलते हुए मुख्यमंत्री के इस भाषण को राज्य में कानून व्यवस्था के नए कड़े रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी का यह रुख राज्य में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर एक नया प्रशासनिक मानक तय करने की दिशा में बड़ा कदम है।