कोलकाता: पश्चिम बंगाल को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मचारियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक नई जनहितैषी योजना 'स्वच्छ कवच' (Swachh Kavach) की शुरुआत की है। एक पायलट प्रोजेक्ट (प्रायोगिक परियोजना) के रूप में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत राज्य के 50,000 सफाई कर्मचारियों को विशेष सुरक्षा किट (Safety Kits) सौंपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।इस भव्य उद्घाटन समारोह में जहां कई सफाई कर्मी सरोकार उपस्थित रहे, वहीं राज्य की विभिन्न नगर पालिकाओं (Municipalities) और नगर विकास संस्थाओं के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली इस कार्यक्रम से जुड़े।
'स्वच्छ भारत अभियान' की सोच का हिस्सा: मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के आरंभ में शहरी विकास एवं नगर नियोजन मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 'स्वच्छ कवच' किट के वितरण के उद्देश्यों और दूरगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद मुख्य संबोधन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वच्छता को एक सामाजिक कर्तव्य और नागरिक चेतना (Civic Sense) का अनिवार्य हिस्सा बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा: "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'स्वच्छ भारत अभियान' आज वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कोलकाता और बिधाननगर नगर निगम के संयुक्त प्रयास से 'स्वच्छता ते स्वागत' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसकी खुद प्रधानमंत्री ने रेड रोड पर आयोजित ऐतिहासिक योग दिवस समारोह में भूरि-भूरि प्रशंसा की थी।"
कंक्रीट के जंगल और जनस्वास्थ्य संकट पर जताई चिंता
अपने पुराने कार्यकाल में पर्यावरण मंत्री के रूप में काम करने के अनुभव को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नागरिकों में जागरूकता की कमी, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। साथ ही शहरी क्षेत्रों में 15 साल से पुरानी गाड़ियों के परिचालन पर प्रभावी निगरानी न होना स्थिति को और जटिल बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि इसका सबसे घातक असर बच्चों, किशोरों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिससे त्वचा रोग और सांस से जुड़ी बीमारियां खतरनाक स्तर पर बढ़ रही हैं। सर्दियों के मौसम में तो एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) इतना खतरनाक हो जाता है कि डॉक्टरों को 'मॉर्निंग वॉक' तक बंद करने की सलाह देनी पड़ती है।
संतुलित विकास पर जोर, 'स्वच्छ ऐप' को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिलीगुड़ी से लेकर आसनसोल या दार्जिलिंग से लेकर दीघा तक— राज्य के हर शहर का विकास बहुआयामी और संतुलित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने जरूरी फ्लाईओवर, रोड ओवर ब्रिज या सुंदर ऑडिटोरियम हैं, उतनी ही प्राथमिकता स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को मिलनी चाहिए।
हाल ही में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर की उपस्थिति में स्वच्छ ऐप का भी अनावरण किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई सरकार को जिम्मेदारी संभाले अभी मात्र डेढ़ महीना ही हुआ है, लेकिन इसके बावजूद अग्निमित्रा पॉल और उमेश राय के नेतृत्व में इस विभाग ने विकास कार्यों के साथ-साथ स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
'मां के नाम एक पेड़': 7 करोड़ वृक्षारोपण का मेगा प्रोजेक्ट
गत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शुरू हुए 'मां के नाम एक पेड़' अभियान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए एक बड़े पर्यावरण अनुकूल प्लान की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस चालू वर्ष में पश्चिम बंगाल सरकार पूरे राज्य में कुल 7 करोड़ पौधे लगाने का महा-लक्ष्य लेकर चल रही है।
सुवेंदु अधिकारी ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिम्मेदारी केवल पौधा लगाने और फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सरकार अगले दो वर्षों तक इन सभी पौधों के पूर्ण रखरखाव और संरक्षण की जिम्मेदारी उठाएगी।