पश्चिम बंगाल : में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और 'जोड़ा फूल' (तृणमूल प्रतीक) पर कब्जे की कानूनी लड़ाई के बीच ममता बनर्जी के 'कालीघाट गुट' ने बड़ा राजनीतिक दांव चला है। सोमवार शाम (14 सितंबर 2026) कालीघाट टीएमसी के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की। इस याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु को फैसला लेने के लिए 18 अक्टूबर तक की दो महीने की समयसीमा दी थी, लेकिन उस अवधि के खत्म होने से पहले ही कालीघाट गुट ने शीर्ष अदालत का रुख किया है।
10 हेवीवेट नेताओं और मंत्रियों पर लटकी तलवार
कालीघाट शिविर के वरिष्ठ सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में याचिका दाखिल किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। जिन 10 नेताओं की सदस्यता रद्द करने की अर्जी दी गई है, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- ऋतब्रत बनर्जी (नेता प्रतिपक्ष)
- अरूप रॉय
- फिरहाद हकीम
- संदीपन साहा
- अखरूज्जमान
- शिउली साहा
- सबीना यासमिन
- विप्लव मित्रा
- जावेद खान
- रथीन घोष
'बाकी बागियों को वापसी के लिए दिया गया थोड़ा समय'
कल्याण बनर्जी ने स्पष्ट किया कि बागी खेमे के सभी विधायकों के खिलाफ एक साथ मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि पहली सूची में केवल 10 मुख्य चेहरों और नीति-निर्धारकों के नाम रखे गए हैं। कल्याण बनर्जी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "हमने बाकी विधायकों को थोड़ा समय और ऑक्सीजन दिया है। अगर वे अपनी गलती समझकर कालीघाट वापस लौटना चाहते हैं, तो दरवाजे खुले हैं। अगर वे नहीं लौटे, तो उनका पूरा राजनीतिक करियर तबाह हो जाएगा।"
ऋतब्रत का तीखा पलटवार: 'धैर्य रखें, सब साफ हो जाएगा'
कालीघाट गुट के इस कानूनी कदम पर पलटवार करते हुए बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने एक वीडियो संदेश में तंज कसते हुए कहा, "कुछ दिन इंतजार कीजिए, कौन किसको ऑक्सीजन दे रहा है, यह जल्द पता चल जाएगा। बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले सोच लें। मुझे तो उल्टा संदेह है कि आपके साथ मौजूद सांसदों और विधायकों की कुर्सी बचेगी या नहीं। थोड़ा धैर्य रखिए, सब पानी की तरह साफ हो जाएगा।"विधानसभा में सदस्यों की योग्यता और पार्टी के असली हकदार को लेकर शुरू हुई यह लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में जाने से बंगाल की राजनीति में भारी नाटकीय मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं।