कोलकाता: उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को घोषणा की कि 'प्रधानमंत्री चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना' (PMCSPY) के क्रियान्वयन को अंतिम रूप दे दिया गया है। शनिवार शाम मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय समिति (SLC) की बैठक में 313.30 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी गई। अब प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए टी बोर्ड ऑफ इंडिया के माध्यम से भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की स्टीयरिंग कमेटी को भेजा जाएगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास पर होगा सबसे अधिक खर्च
योजना के तहत 177 करोड़ रुपये चाय श्रमिक शिक्षा योजना (CSSY) पर खर्च किए जाएंगे, जिससे स्कूलों के भवन, कक्षाओं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा। वहीं 72 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (CSSSY) के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनसे चाय बागानों के स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके अलावा 63 करोड़ रुपये चाय श्रमिक आश्रय योजना (CSAY) पर खर्च होंगे, जबकि 1.30 करोड़ रुपये टी बोर्ड की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU), समन्वय और संचार के लिए निर्धारित किए गए हैं।
321 आधुनिक रेस्टिंग शेड बनेंगे
योजना के तहत चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 321 आधुनिक रेस्टिंग शेड बनाए जाएंगे। इनमें 88 शेड पहाड़ी क्षेत्रों और 233 शेड मैदानी इलाकों में स्थापित किए जाएंगे। मैदानी क्षेत्रों में प्रति शेड लगभग 19.11 लाख रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 21.09 लाख रुपये की लागत आएगी।
श्रमिकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
इन रेस्टिंग शेड्स में आधुनिक शौचालय, सिरेमिक फर्श, बिजली, पंखे, भोजन कक्ष में टाइल्स और ऑफ-ग्रिड रूफटॉप सोलर सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मैदानी इलाकों में सोलर वाटर पंप और भूमिगत बोरिंग की व्यवस्था होगी, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक झरनों से पानी लाकर सीमेंट टैंकों के जरिए जलापूर्ति की जाएगी।
उत्तर बंगाल विकास विभाग होगा नोडल एजेंसी
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तर बंगाल विकास विभाग (NBDD) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। विभाग एक विशेष प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाकर टी बोर्ड के साथ समन्वय करेगा। पश्चिम बंग समग्र शिक्षा मिशन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग भी योजना के कार्यान्वयन में सहयोग करेंगे। दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरदुआर, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर के जिलाधिकारियों को समयबद्ध तरीके से योजना लागू कराने और नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।