कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद भाजपा संगठन को नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत करने की तैयारी में जुटी है। हालिया प्रशिक्षण शिविर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ-साथ संगठन की मूल विचारधारा और अनुशासन को बनाए रखने का संदेश दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के बाद 22 से 30 अगस्त के बीच जिला स्तर पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाने की योजना है।
नेतृत्व का मतलब सिर्फ मंच पर बैठना नहीं
प्रशिक्षण के दौरान भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया। नेताओं को बताया गया कि प्रभावी नेतृत्व का अर्थ केवल मंच पर मौजूद रहना नहीं, बल्कि दूरदराज के इलाकों में लोगों तक पहुंचना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तेजी से सही निर्णय लेना भी है। साथ ही जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ संवेदनशील और विनम्र व्यवहार करने की सीख दी गई।
तकनीक बनेगी संगठन की ताकत
पार्टी के प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। संगठन को मजबूत करने, जनसंपर्क बढ़ाने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने की बात कही गई। भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सोशल मीडिया, डिजिटल टूल्स और संगठनात्मक कार्यपद्धति जैसे विषयों को भी शामिल किया जाता रहा है।
अनुशासन और ‘कटमनी’ के आरोपों पर सख्त रुख
प्रशिक्षण के साथ पार्टी के भीतर अनुशासन और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया। राजारहाट और दमदम समेत कुछ इलाकों से कथित अवैध गतिविधियों और ‘कटमनी’ की शिकायतों पर नाराजगी जताए जाने की बात सामने आई है। नेतृत्व ने कथित तौर पर स्पष्ट किया कि पार्टी विरोधी, अनैतिक या अनुशासनहीन गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिलों में भी चलेगा प्रशिक्षण अभियान
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण के बाद जिला स्तर पर भी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संगठन, विचारधारा, जनसंपर्क और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। पार्टी का लक्ष्य संगठन को तकनीक और आधुनिक कार्यशैली से जोड़ते हुए जमीनी स्तर पर मजबूत करना है।