कोलकाता: पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले चुनावी मैदान में एक और बड़ा बदलाव हुआ है। चुनाव आयोग ने दो राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न बदल दिए हैं। नौशाद सिद्दीकी की इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) को अब 'खाम' की जगह अलमारी चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) को 'बांसुरी' के स्थान पर टेबल चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले ISF के सामने बदली पहचान
नौशाद सिद्दीकी की पार्टी ISF पिछले कई चुनावों से 'खाम' चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरती रही है। 2021 में पार्टी के गठन के समय उसे अपना स्थायी चुनाव चिह्न नहीं मिला था। इसके बाद ISF ने 'खाम' प्रतीक के साथ चुनावी राजनीति में अपनी पहचान बनाई। 2021 के विधानसभा चुनाव में नौशाद सिद्दीकी ने इसी प्रतीक पर भांगड़ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। बाद में पंचायत और लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने इसी निशान का इस्तेमाल किया।
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ISF ने स्थायी चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग से संपर्क किया था। हालांकि विधानसभा चुनाव में भी पार्टी 'खाम' चुनाव चिह्न के साथ ही मैदान में उतरी और नौशाद सिद्दीकी एक बार फिर भांगड़ से निर्वाचित हुए। अब उपचुनाव से ठीक पहले आयोग ने यही चुनाव चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) को आवंटित कर दिया है। ISF को इसके बदले 'अलमारी' प्रतीक दिया गया है।
खाम प्रतीक वापस लेने की मांग, आयोग को पत्र
चुनाव चिह्न में हुए इस बदलाव के बाद नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 'खाम' प्रतीक वापस दिए जाने की मांग की है। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देने की बात भी कही है और जरूरत पड़ने पर कलकत्ता हाई कोर्ट जाने की बात कही है। रिपोर्टों के मुताबिक, नौशाद का कहना है कि ISF लंबे समय से इस प्रतीक के साथ चुनाव लड़ती रही है और पार्टी की पहचान इसी निशान से जुड़ी हुई है।
हुमायूं कबीर की पार्टी को भी बदलना पड़ा चुनाव चिह्न
दूसरी ओर, हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के चुनाव चिह्न में भी बदलाव हुआ है। 2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 'बांसुरी' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। अब रेजिनगर उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बांसुरी की जगह टेबल प्रतीक दिया है।
हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजिनगर और नाओदा, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने रेजिनगर विधानसभा सीट छोड़ दी। अब इसी सीट पर उपचुनाव हो रहा है और हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद उनकी पार्टी के उम्मीदवार हैं। रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित है।
दो सीटों पर उपचुनाव और कई दलों के बदले प्रतीक
रेजिनगर के अलावा नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद यह सीट खाली हुई है। दोनों सीटों के उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग के फैसलों के कारण कई राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न बदल गए हैं।
इससे पहले आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दो धड़ों को लेकर भी अलग नाम और चुनाव चिह्न तय किए थे। ममता बनर्जी के धड़े को 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का प्रतीक दिया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के धड़े को 'गणतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और खाम चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। इसी फैसले के बाद ISF के पास मौजूद खाम प्रतीक भी बदल गया।
यानी उपचुनाव से पहले चुनावी मैदान में सिर्फ उम्मीदवार और दल ही नहीं, बल्कि उनके चुनाव चिह्न भी बदलते नजर आ रहे हैं। ISF अब अलमारी, जबकि हुमायूं कबीर की पार्टी टेबल चुनाव चिह्न के साथ उपचुनाव में उतरेगी।