कोलकाता: पश्चिम बंगाल में रक्त और प्लाज्मा की कथित तस्करी की जांच के बीच राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी ब्लड सेंटरों की व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (SBTC) के संयुक्त निदेशक डॉ. बिजय प्रसाद मुखोपाध्याय की ओर से 19 अगस्त 2026 को राज्य के सभी सरकारी ब्लड सेंटरों के मेडिकल ऑफिसर-इन-चार्ज और RBTC निदेशकों को Memo No. SBTC/148 जारी किया गया। परिपत्र में मरीजों और उनके परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान करने, रक्त उपलब्ध होने के बावजूद देरी करने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकारी ब्लड सेंटरों के लिए 4 प्रमुख निर्देश
1. उपलब्ध रक्त तुरंत देना होगा
यदि किसी ब्लड सेंटर में मरीज के लिए आवश्यक ब्लड ग्रुप या ब्लड कंपोनेंट उपलब्ध है और वैध रीक्विजिशन स्लिप प्रस्तुत की गई है, तो बिना अनावश्यक देरी के रक्त उपलब्ध कराना होगा। मरीज या उनके परिजनों को बेवजह परेशान करने या बार-बार वापस भेजने की अनुमति नहीं होगी।
2. स्टॉक नहीं होने पर दूसरे सेंटर से समन्वय
यदि किसी ब्लड सेंटर में आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं है, तो परिजनों को अलग-अलग ब्लड बैंकों के चक्कर लगाने के लिए नहीं कहा जाएगा। संबंधित ब्लड सेंटर को RFID सॉफ्टवेयर के माध्यम से आसपास के अन्य सरकारी ब्लड सेंटरों से संपर्क कर रक्त की व्यवस्था करने का हर संभव प्रयास करना होगा।
3. थैलेसीमिया मरीजों को प्राथमिकता
थैलेसीमिया और ट्रांसफ्यूजन-डिपेंडेंट मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता को विशेष प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। ऐसे मरीजों को समय पर और नियमित रूप से आवश्यक रक्त उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
4. मरीजों और परिजनों से सम्मानजनक व्यवहार
ब्लड सेंटर के कर्मचारियों, खासकर काउंटर स्टाफ को मरीजों और उनके परिजनों के साथ विनम्र, संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार करने का निर्देश दिया गया है। दुर्व्यवहार, अनावश्यक देरी, टालमटोल या मरीजों को परेशान करने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
तत्काल प्रभाव से लागू होंगे निर्देश
SBTC ने सभी सरकारी ब्लड सेंटरों के प्रभारी अधिकारियों को इन निर्देशों का तत्काल और सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम का उद्देश्य सरकारी ब्लड सेंटरों में मरीजों के लिए सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुचारु बनाना है। साथ ही, व्यवस्था में मौजूद संभावित बिचौलियों और अनियमितताओं पर नियंत्रण को भी इस पहल का अहम हिस्सा माना जा रहा है।