कोलकाता: पश्चिम बंगाल में होटल, रेस्टोरेंट समेत सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था अब प्रशासन की सख्त निगरानी में होगी। बुधवार को हुई प्रशासनिक बैठक में फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल के पालन और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा का फैसला लिया गया। हालिया होटल अग्निकांडों के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा ऑडिट पर जोर दिया है।
पुराने भवनों में चल रहे होटल-रेस्टोरेंट पर विशेष नजर
प्रशासन की खास नजर पुराने भवनों पर रहेगी। कोलकाता समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पुराने भवनों में संचालित होटल और रेस्टोरेंट में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और सुरक्षा ढांचे की जांच की जाएगी। विभाग पहले से फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस जैसी सेवाएं भी संचालित करता है।
सामान्य भवन की अनुमति लेकर होटल चलाने पर कार्रवाई
बैठक में ऐसे मामलों पर भी चर्चा हुई, जहां सामान्य भवन के रूप में अनुमति लेने के बाद वहां होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। फ्री स्कूल स्ट्रीट के हालिया अग्निकांड के बाद इस तरह के नियम उल्लंघन को लेकर प्रशासन ने सख्ती का संकेत दिया है।
पहले नोटिस, फिर खाली कराने और सील करने की कार्रवाई
दमकल राज्यमंत्री कौशिक चौधरी के अनुसार, जिन होटल और रेस्टोरेंट में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होगा, उन्हें पहले नोटिस दिया जाएगा। कमियां दूर करने के लिए तय समयसीमा मिलेगी। इसके बावजूद नियमों का पालन नहीं करने पर प्रतिष्ठान को खाली कराने का निर्देश दिया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे सील भी किया जा सकता है।
फायर सेफ्टी के साथ बिजली व्यवस्था की भी जांच
होटलों में आग लगने की संभावित वजहों में शॉर्ट सर्किट का मुद्दा भी बैठक में उठा। इसलिए अब केवल अग्निशमन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि बिजली के पूरे ढांचे की भी जांच होगी। खास तौर पर छोटे होटलों में स्वीकृत लोड से अधिक एसी चलाने की शिकायतों पर नजर रखी जाएगी।
CESC और WBSEDCL की होगी अहम भूमिका
बिजली से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के लिए CESC और WBSEDCL को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। यह देखा जाएगा कि किसी होटल या रेस्टोरेंट में स्वीकृत बिजली लोड से अधिक खपत तो नहीं हो रही है।
अब सिर्फ फायर सर्टिफिकेट से नहीं चलेगा काम
आने वाले दिनों में प्रशासन होटल और रेस्टोरेंट की वास्तविक फायर सेफ्टी व्यवस्था, भवन का वैध इस्तेमाल, बिजली का ढांचा और स्वीकृत लोड समेत कई पहलुओं की जांच करेगा। यानी सिर्फ फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट होना पर्याप्त नहीं होगा, सुरक्षा मानकों का जमीन पर पालन भी जरूरी होगा।