कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद तारातला में एक निर्माणाधीन गोदाम का ढहना पहली बड़ी आपदा है। इस दर्दनाक हादसे में 16 लोगों की जान चली गई, जबकि राहत और बचाव दल की मुस्तैदी से मलबे से 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की खास बात यह रही कि हाल के दिनों में पहली बार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस और दमकल विभाग के साथ सेना और केंद्र सरकार की सिविल डिफेंस टीम ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
शनिवार को अलीपुर बॉडीगार्ड लाइंस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल सभी जांबाज कर्मियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सेना के पास मौजूद अत्याधुनिक उपकरणों की वजह से ही तारातला हादसे में मरने वालों की संख्या को कम किया जा सका।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को किया स्वीकार, नई फोर्स का वादा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बेबाकी से स्वीकार किया कि राज्य के पास ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों की कमी है। उन्होंने घोषणा की:"आगामी एक वर्ष के भीतर पश्चिम बंगाल में पूरी तरह से आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित जवानों से लैस एक नई राज्य आपदा प्रबंधन वाहिनी (Disaster Management Force) का गठन किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार आवश्यक फंड आवंटित करेगी।"
रेस्क्यू हीरोज और आम जनता का जताया आभार
अलीपुर बॉडीगार्ड लाइंस में पुलिस द्वारा आयोजित इस सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने पूरी रेस्क्यू टीम को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। इसमें शामिल थे:
सिविल डिफेंस: 160 कर्मी
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग: 120 कर्मी
रेलवे कर्मचारी: 90 कर्मी
ट्रैफिक पुलिस: 75 कर्मी
मुख्यमंत्री ने इस संयुक्त अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि कोलकाता में पहले भी बड़े हादसे हुए हैं, लेकिन राज्य और केंद्र की सभी एजेंसियों को इस तरह एक साथ मिलकर काम करते हुए पहले कभी नहीं देखा गया।इसके साथ ही उन्होंने हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले मदद के लिए दौड़ने वाले स्थानीय युवाओं (कमन पीपल) को सलाम किया। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही व्यक्तिगत रूप से जाकर इन युवाओं से मुलाकात करेंगे और उनका धन्यवाद करेंगे।
बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश
इस हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने बड़े फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि राज्य में पांच मंजिल या उससे अधिक ऊंची निर्माणाधीन इमारतों की विशेष जांच की जाएगी। निर्माण से जुड़े सुरक्षा नियमों (Safety Rules) का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पूरी पड़ताल की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।