नई दिल्ली:भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलीमर करेंसी यानी प्लास्टिक के नोट शुरू करने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती चरण में है, लेकिन इस दिशा में संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। अगर यह योजना लागू होती है तो भारतीय करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
प्लास्टिक नोट लाने पर विचार कर रहा है आरबीआई
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक पॉलीमर आधारित नोटों को लेकर संभावनाएं तलाश रहा है। बढ़ती करेंसी मांग, नोटों की लंबी उम्र और बेहतर सुरक्षा फीचर्स को देखते हुए इस विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती स्तर पर है और अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है।
2012 में भी हुआ था प्रयोग
भारत इससे पहले भी प्लास्टिक नोटों का परीक्षण कर चुका है। वर्ष 2012 में कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों का ट्रायल किया गया था। लेकिन उस समय एटीएम मशीनों और नोट प्रोसेसिंग सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें सामने आने के कारण इस प्रयोग को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।
क्या होती है पॉलीमर करेंसी?
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तरह कपास आधारित सामग्री से नहीं, बल्कि विशेष प्लास्टिक पदार्थ Bi-axially Oriented Polypropylene (BOPP) से बनाए जाते हैं। ये नोट मजबूत, लचीले और लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं। इन्हें कागज के नोटों की तरह मोड़ा भी जा सकता है और ये आसानी से फटते नहीं हैं।
पॉलीमर नोटों के क्या हैं फायदे?
विशेषज्ञों के मुताबिक पॉलीमर नोट पारंपरिक नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। इन पर गंदगी, नमी और पानी का असर कम होता है। इनके लंबे समय तक चलने के कारण बार-बार नए नोट छापने की जरूरत भी घट जाती है, जिससे छपाई लागत में कमी आ सकती है। साथ ही इनमें नकली नोटों को रोकने के लिए उन्नत सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं।
कई देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट
दुनिया के कई देशों में पॉलीमर करेंसी सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा रही है। ऑस्ट्रेलिया इस तकनीक को अपनाने वाला पहला देश था। इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और रोमानिया जैसे देशों ने भी प्लास्टिक नोटों को अपनी मुद्रा प्रणाली का हिस्सा बनाया।
करेंसी सिस्टम में आ सकता है बड़ा बदलाव
अगर आरबीआई इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो भारतीय मुद्रा प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे नोटों की गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊपन बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल वित्तीय और तकनीकी पहलुओं पर अध्ययन जारी है।