बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मंदिर में शिवलिंग का लगातार क्षरण हो रहा है. इसी वजह से यहां गर्भगृह में आम भक्तों को प्रवेश बंद कर दिया है. अब क्षरण रोकने के लिए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम भी उज्जैन पहुच चुकी है, जो इसके कारणों का पता क्र रही हैं|
जीएसआई डायरेक्टर की सात सदस्य टीम ने उज्जैन पहुंचकर किया अध्ययन
जीएसआई भोपाल ऑफिस से आए डायरेक्टर की सात सदस्य टीम ने उज्जैन पहुंचकर बारीकी से शिवलिंग में हुई दरारों का अध्ययन किया. पिछली रिपोर्ट से इसका मिलान किया. साथ ही मशीनों से टेस्ट भी किए. इसके बाद, टीम ने शिवलिंग पर चढ़ाई गई सामग्री फूल, श्रृंगार सामग्री, दही, भांग और जल आदि का सैम्पल लिया. साथ ही, आरओ जल के सैंपल भरकर ले गए. लैबोरेटरी में टेस्टिंग के बाद रिपोर्ट जीएसआई के अधिकारियों को सौंपी जाएगी.
2017 से ही सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हो रहे हैं संरक्षण के प्रयास
साल 2017 में महाकाल मंदिर शिवलिंग को हो रहे क्षरणको लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था. तब यह आदेश जारी किया कि जीएसआई और एएसआई टीम प्रति वर्ष शिवलिंग की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे. यह रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी.
पूजन सामग्री से बैक्टिरिया पनप रहे, इससे शिवलिंग में नुकसान बढ़ा
जीएसआई की टीम ने दिसंबर 2022 में शिवलिंग की वैज्ञानिक तौर तरीको से जाच की थी. उसमे पाया कि 2021 में दिए गए कई सुझावों पर अमल नहीं किया गया था. शिवलिंग पर भस्म का गिरना और श्रद्धालुओं की स्पर्श पूजा और रगड़ने से ज्योतिर्लिंग को लगातार नुकसान हो रहा है. महाकाल के शिवलिंग को रगड़ने, भस्म गिरने और स्पर्श पूजा से ज्योतिर्लिंग पर छोटे-छोटे छिद्र बन गए हैं. ये बढ़ रहे हैं. इन छिद्रों में बैक्टीरिया पनपते हैं, जिससे क्षरण हो रहा है. इसके बाद जुलाई 2023 से गर्भ गृह में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
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