दुर्गः सियासत और खेल की बाजी कब, कैसे पलटती है कोई नहीं जान सकता। कुछ दिनों पहले तक छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी। इसमें दुर्ग जिले से खुद सीएम भूपेश बघेल समेत दो मंत्री ताम्रध्वज साहू और गुरु रुद्रकुमार मंत्री थे। जबकि अरुण वोरा को राज्य मंत्री का दर्जा मिला था। लेकिन हर दौर में सूबे का ताकतवर जिला रहा दुर्ग। लेकिन इस बार की सरकार बनने पर सियासी गढ़ दुर्ग दुर्ग नहीं रहा। पिछले सात दशक में पहली बार ऐसा हुआ है, जब दुर्ग जिले से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया है।
प्रदेश की पॉलिटिक्स में दुर्ग जिले का काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह जिला एमपी से अलग होने से पहले भी राजनीति में अपना अहम किरदार निभाता आया है। यह प्रदेश का ऐसा जिला है जहां से 7 दशकों की राजनीति में हर बार देश-प्रदेश को कई दिग्गज लीडर दिए है। जो कि समय के साथ राजनीति के टॉप पर पहुंचे है। लेकिन इस बार इसका रुतबा घटा है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में घटा दुर्ग जिले का महत्व
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