सागर. मध्य प्रदेश में नौरादेही अभ्यारण को और वीरांगना दुर्गावती अभ्यारण को मिलाकर प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनाया गया. इस समय टाइगर रिजर्व में 19 बाघ सहित तेंदुए, भेड़िए, हाथी, भालू, नील गाय, लकड़बग्घा, चीतल, चिंकारा, सांभर, हिरण सहित कई तरह की जानवरों का बसेरा है. 2400 एकड़ की जगह में पहले इस जंगल में असीम संभावनाएं हैं. करीब ढाई महीने पहले बुंदेलखंड के दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफिकेशन जारी किया गया था और पिछले 48 सालों से अभ्यारण के रूप में इसको संवारा जा रहा है. अभी तक यहां पर फील्ड वेटरनरी डॉक्टर और रेस्क्यू टीम सदस्य नहीं की गई है.
जिसकी वजह से कई बार जानवरों को समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से जान से हाथ भी धोना पड़ा है. नौरादेही को बाघों से आबाद करने वाले बाघ किशन को भी समय पर इलाज नहीं मिल पाया था,जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई थी. यहां पर टेरिटरी को लेकर दो बाघों के बीच में संघर्ष हो गया था, जिसमें बाघ किशन को सर में और जबड़े में चोट आने की वजह से वह 10 दिन तक कुछ खा नहीं पाया था. वहीं इलाज करने और रेस क्यों करने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व से टीम बुलानी पड़ी थी. बाघ किशन की मौत से कुछ दिन पहले पेड़ से गिरे भालू को भी चोट आई थी उसे भी इलाज करने के लिए बाहर से डॉक्टर को बुलाना पड़ा था लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
नौरादेही अभ्यारण को और वीरांगना दुर्गावती अभ्यारण को मिलाकर प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बनाया
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